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खुदीराम के बमकांड के बाद तेज हुई थी क्रांति की ज्वाला

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खुदीराम के बमकांड के बाद तेज हुई थी क्रांति की ज्वाला

डी-31 खुदीराम बोस की शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर हुई गोष्ठी ध्वजा साहू स्मारक समिति और संकल्प ने किया आयोजन लेखक अरिंदम व प्रकाश संग शामिल हुआ आया हुआ जत्था उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर शहीद खुदीराम बोस की शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर ध्वजा साहू स्मारक समिति व संकल्प ने खादी भंडार रोड स्थित ध्वजा भवन में समारोह आयोजित किया. मुख्य वक्ता मेदिनीपुर से आये लेखक अरिंदम भौमिक रहे. कहा कि खुदीराम की जन्मस्थली मिदनापुर में भी बहुत सारे लोगों को यह नहीं पता कि खुदीराम को मुजफ्फरपुर में फांसी हुई थी. करीब चार वर्षों के रिसर्च के बाद मैंने ””खुदीराम कौन”” पुस्तक लिखी है. इसमें खुदीराम बोस के जीवन से जुड़े कई पहलू शामिल हैं. पं बंगाल के सिलदा से आये विशिष्ट वक्ता प्रकाश हलधर ने कहा कि वर्ष 1995 से वह हर वर्ष खुदीराम बोस की शहादत दिवस पर मुजफ्फरपुर आ रहे हैं. यहां की भूमि हमेशा मुझे समाजसेवा और देश के प्रति समर्पण की प्रेरणा भरती है. स्वागत डॉ संजय पंकज ने किया. समाजसेवी संजीव साहू ने कहा कि खुदीराम बोस के बम धमाके के बाद शहर में क्रांति की ज्वाला तेज हो गयी थी. उस वक्त ध्वजा साहू भी उनसे प्रेरणा लेकर गरम दल में शामिल हो गये थे. इतिहासकार आफाक आजम ने कहा कि दो मई को प्रफुल्ल चाकी ने शहादत दी थी. प्रो अबुजर कमालुद्दीन, पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता, संस्कृतिकर्मी बैजू कुमार ने शहीद के जीवन-संघर्ष पर व्यापक दृष्टिकोण रखा. मौके पर पं बंगाल से आये अनूप मल्लिक, पंपा मल्लिक, रवींद्रनाथ डे, टूंपा डे, कल्याणी महता व तुहीन महता के अलावा तारिक इमाम, मो इश्तेयाक, बिहार बंगाली समिति के उपाध्यक्ष राणा कर्मकार, जितेंद्र गुप्ता, सोनू सरकार, मो अरमान, दीनबंधु सहित अन्य ने विचार रखे.

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