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तकनीक से दोस्ती, 80 की उम्र में सीख रहे कंप्यूटर

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तकनीक से दोस्ती, 80 की उम्र में सीख रहे कंप्यूटर

बुजुर्गों ने कहा-सीखने की कोई उम्र नहीं होती जब तक जियें, सीखना जारी रखना चाहिये मुजफ्फरपुर सीखने की कोई उम्र नहीं होती है. सिर्फ सीखने का जज्बा होना चाहिए. बहुत सारे लोग ऐसे हैं, जिनके लिए नयी चीजें सीखना उनकी जरूरत में शायद ही शामिल हो, लेकिन वे अपने जज्बे से नयी चीजें सीख रहे हैं. शहर में बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जो सेवानिवृत्ति के बाद कंप्यूटर सीख रहे हैं.पिछले तीन महीने में उन्होंने न केवल कंप्यूटर का ऑपरेटिंग सिस्टम सीखा है, बल्कि इंटरनेट सर्फिंग भी कर रहे हैं. अब ये बुजुर्ग एमएस वर्ड, एक्सेल व टाइपिंग सीख रहे हैं.यह सुविधा उन्हें फ्री मिल रही है. गोला रोड में चल रहे इस कंप्यूटर सेंटर की स्थापना रोटरी क्लब के अजीत अग्रवाल व लायनेस क्लब की पूर्व अध्यक्ष अलका अग्रवाल ने की थी. यहां छात्रों को फ्री में कंप्यूटर सिखाया जाता है, लेकिन पिछले तीन महीने से अब यहां बुजुर्गों के लिए भी कंप्यूटर शिक्षा का कोर्स चल रहा है. कंप्यूटर केंद्र की देख प्रबंधक सुधीर कुमार, प्रोजेक्ट प्रभारी निशी वर्मा, रौनक साहू, शिवम, अंकित, खुशी, फरहीन तबस्सुम, अल्लाह रखा, ऋषि वर्मा व ओशीन वर्मा करती हैं. बच्चों व बुजुर्गों को यही कंप्यूटर में प्रशिक्षित भी करती हैं. यहां कंप्यूटर की शिक्षा लेने वाले बुजुर्ग बैंक व अन्य नौकरी से सेवानिवृत्त हैं. छह महीने में सीखा बेसिक कोर्स जब हमलोग नौकरी में थे तो कंप्यूटर का इस्तेमाल बहुत कम होता था, लेकिन आज यह सभी की जरूरत बन चुका है. यहां से मैंने कंप्यूटर का बेसिक कोर्स किया है और टाइपिंग भी कर रहा हूं. अब कहीं मेल के जरिये पत्र व्यवहार करने व इंटरनेट सर्फिंग में परेशानी नहीं होती है.अब कोई काम करने के लिए किसी दूसरे पर निर्भर नहीं हूं. – विमल किशोर उप्पल, रिटायर्ड बैंककर्मी, उम्र 83 वर्ष ================== इंटरनेट पर कुछ ढूंढना सीख गया कंप्यूटर का बेसिक कोर्स करने के बाद टाइपिंग के अलावा इंटरनेट का उपयोग आसान हो गया है. इंटरनेट के जरिये बहुत-सी चीजों की जानकारी मिल जाती है. टाइपिंग सीखने से पत्र टाइप करना आसान हो गया है. कोई लेख लिखना हो या कुछ लिख कर कहीं भेजना हो, सब कुछ खुद ही कर लेता हूं. किसी तरह की परेशानी नहीं होती है. – राजकिशोर, रिटायर्ड बैंककर्मी, उम्र 80 वर्ष

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