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आपके पैन नंबर से बन रहा फर्जी जीएसटी लाइसेंस

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आपके पैन नंबर से बन रहा फर्जी जीएसटी लाइसेंस

उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर दूसरे के फर्जी पैन से जीएसटी लाइसेंस बना कर कई ठग उस व्यक्ति के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं. जिस व्यक्ति के नाम से लाइसेंस बन रहा है, उससे करोड़ों का व्यापार दिखाया जा रहा है और जिनके पैन पर फर्जी लाइसेंस बना है, उस पर इनकम टैक्स लाखों का टैक्स निर्धारित कर रहा है. इतना ही नहीं, ये ठग फर्जी लाइसेंस से सरकार को भी लाखों का चूना लगा रहे हैं, लेकिन राज्य कर विभाग इससे बेखबर है. संभव है कि किसी के पैन से बने जीएसटी लाइसेंस से दो करोड़ का टर्नओवर दिखाया गया हो तो उस व्यक्ति पर करीब 30 लाख टैक्स की देनदारी बनती है. मालीघाट निवासी राहुल कुमार इस तरह की ठगी का शिकार हुए हैं, लेकिन इससे पहले भी ऐसा मामला आ चुका है. पिछले साल फर्जी जीएसटी लाइसेंस पर करोड़ों के कोयले की खरीदारी की गयी थी, जिसकी जानकारी आज तक विभाग को नहीं मिली. पुलिस अनुसंधान में भी ठगी करने वाले का पता नहीं चला. ऐसे होता है फर्जी लाइसेंस से खेल जीएसटी के फर्जी लाइसेंस बना कर ठगी करने वाला एक्सपर्ट सरकार के राजस्व का चूना लगाता है. चार पांच फर्जी फर्म के नाम पर ये ठग लाइसेंस बनवाते हैं. फिर एक फर्म से दूसरे फर्म के नाम पर करोड़ों के सामान बेचने का रिटर्न भरते हैं और बिना सामान बेचे ही सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ पाते हैं. इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि एक फर्जी फर्म दूसेर फर्जी फर्म से कागज पर एक करोड़ का सामान 18 फीसदी टैक्स के साथ खरीदा. उस सामान के एवज में उसने एक करोड़ 18 लाख चुकाया और फिर उस फर्म ने तीसरे फर्म को 50 लाख का सामान 60 लाख रुपये के हिसाब से 18 फीसदी टैक्स के साथ बेचा. यानी 10 लाख 80 हजार टैक्स लिया. पहले फर्म वाले ने सामान खरीदते समय 18 लाख चुकता किया था. कागज के अनुसार सात लाख 40 हजार वह सरकार को पहले टैक्स दे चुका है. बाकी सामान वह अपने स्टॉक में दिखा रहा है और वह पिछले दिये हुए टैक्स 7 लाख 40 हजार का इनपुट टैक्स क्रेडिट सरकार से वापस ले लेता है. यानी कहीं किसी ने माल न खरीदा और ने बेचा और सरकार को चूना लगाया. जीएसटी लाइसेंस के लिए अब साइन बोर्ड के साथ फोटो अनिवार्य जीएसटी लाइसें के लिये पैन कार्ड, मोबाइल नंबर से जुड़ा आधार कार्ड, इमेल, फोटो, दुकान का ए्ग्रीमेंट कॉपी या मालगुजारी रसीद, कैंसिल चेक और मोबाइल नंबर अनिवार्य है. ठगी करने वाले लोग विभागीय चूक का फायदा उठाकर फर्जी लाइसेंस बना लेते हैं, हालांकि इस तरह के मामले सामने आने के बाद बिहार में अब साइन बोर्ड के साथ फोटो भी अनिवार्य कर दिया गया है. जिससे फर्जी लाइसेंस नहीं बन सके. नियम के अनुसार जीएसटी लाइसेंस के लिये ऑनलाइन अप्लाई के बाद उस स्थल का निरीक्षण भी किये जाने का प्रावधान है, जहां प्रतिष्ठान बताया गया है. वर्जन बिहार में फर्जी लाइसेंस बनाना मुश्किल है. यही कारण है कि यहां के लोगों के पैन कार्ड से केरल में फर्जी जीएसटी लाइसेंस बनाया गया है और करीब दो करोड़ का टर्न ओवर भी दिखाया गया है. हैरानी की बात यह भी है कि एक ही पैन कार्ड से दो प्रतिष्ठानों का जीएसटी रजिस्ट्रेशन किया गया है. लोगों को अपने पैन और आधार कार्ड के सुरक्षित इस्तेमाल के प्रति सचेत रहना चाहिये – प्रदीप कुमार वर्मा, अध्यक्ष, टैक्सेशन बार एसोसिएशन

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