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Home बिहार मुजफ्फरपुर ठंड का असर: आम-लीची के बागानों में बंपर पैदावार के आसार

ठंड का असर: आम-लीची के बागानों में बंपर पैदावार के आसार

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ठंड का असर: आम-लीची के बागानों में बंपर पैदावार के आसार

कम तापमान से लीची के पेड़ों में फूल आने की प्रक्रिया में आयेगी तेजी आम के पेड़ों में नहीं आयेंगे नये पत्ते, कीटों से भी मिलेगा छुटकारा उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर इन दिनों पड़ रही भीषण ठंड भले ही लोगों के लिए कष्टदायक हो, लेकिन आम और लीची के लिए यह वरदान साबित हो रहा है. लीची के पेड़ों में फ्लोरल इंडक्शन यानी फूल आने की प्रक्रिया के लिए लगातार कम तापमान की जरूरत होती है, जो अभी के शीतलहर से लीची के पेड़ों को मिल रही है. उद्यान निदेशालय के फसल प्रबंधन एडवाइजरी ने भी अभी के ठंड को आम और लीची के अच्छा माना है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि इस समय ठंड नहीं पड़ती, तो लीची के पेड़ों में मंजर के बजाय पत्ते आने की संभावना बढ़ जाती, जैसा पिछले साल हुआ था. वर्तमान में अधिक ठंड पेड़ों को सुप्तावस्था में जाने में मदद करेंगे, जिससे पेड़ों की ऊर्जा बचेगी और फरवरी के अंत तक पेड़ों में शानदार मंजर आयेगा. इससे फल लगने की दर बढ़ जायेगी. अत्यधिक ठंड और कोहरे के कारण लीची में लगने वाले हानिकारक कीट माइट और शूट बोरर के अंडे और लार्वा नष्ट हो जायेंगे. इससे किसानों का कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम हो जायेगा. आम के मंजर आने के लिए भी खास अवधि में कम तापमान की जरूरत होती है. दिसंबर और जनवरी की ठंड आम के पेड़ों को वानस्पतिक अवस्था यानी पत्ते निकलना से हटाकर प्रजनन अवस्था यानी फूल आना में ले जाते हैं. इस समय इतनी ठंड नहीं होती तो पेड़ों में नये पत्ते निकल आते और मंजर नहीं लगते. इस ठंड से आम में लगने वाले मीली बग और हॉपर जैसे कीटों के अंडों को नष्ट करने में मदद मिलेगी, जिससे आगे चलकर कीड़ों का प्रकोप कम होगा. इस ठंड से किसान भी उत्साहित हैं, उन्हें उम्मीद है कि इस बार आम और लीची की फसल अच्छी होगी. लीची का औसत उत्पादन – 80 हजार से एक लाख टन लीची की खेती – 12 हजार हेक्टेयर औसत कारोबार – 300 – 600 करोड़ आम का औसत उत्पादन – 1.4 लाख – 1.8 लाख टन आम की खेती – 15 हजार हेक्टेयर औसत कारोबार – 250 – 350 करोड़ वर्जन इस बार की ठंड से आम और लीची की अच्छी फसल के लिए हमलोग काफी आशान्वित हैं. ऐसी ही ठंड दस दिन और रह जाये तो इस बार की फसल काफी अच्छी होगी. अभी कीटों का खतरा भी नहीं है. बागों में नमी भी बनी हुई है. – बिंदेश्वर, आम और लीची किसान,राजा पुनास, अहियापुर पिछले साल कम ठंड के कारण लीची के कई पेड़ों में अच्छा फलन नहीं हुआ था. इस बार मौसम काफी अनुकूल है. हमलोग अच्छे करोबार की उम्मीद कर रहे हैं. कोई प्राकृतिक आपदा नहीं आये तो इस बार अच्छी फसल होगी – शत्रुध्न त्रिपाठी, लीची किसान, कपरपुरा, कांटी करीब पांच-सात वर्ष के बाद इस बार आम और लीची की फसल होने की उम्मीद है. लीची के किसानों को पिछले वर्ष काफी कम फायदा हुआ था. इस बार फलन अच्छा हुआ तो किसानों का कारोबार अच्छा होगा. – बच्चा प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार लीची उत्पादक संघ लीची के लिए इस मौसम में ठंड की जरूरत है. अभी का मौसम बिल्कुल अनुकूल है. अगर दिसंबर के मध्य से ही इस तरह का ठंड शुरू हो जाता तो और अधिक फायदा होता. जिन पेड़ों में नये पत्ते नहीं आये हैं, उसमें फलन अच्छा होगा – डॉ विकास दास, निदेशक, राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र

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