[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार मुजफ्फरपुर बज्जिका मैन्युस्क्रिप्ट पेंटिंग पारंपरिक चित्रकला से भिन्न

बज्जिका मैन्युस्क्रिप्ट पेंटिंग पारंपरिक चित्रकला से भिन्न

0
बज्जिका मैन्युस्क्रिप्ट पेंटिंग पारंपरिक चित्रकला से भिन्न

दीपक-20

एनबीआइ ने किया कार्यशाला व जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

मुजफ्फरपुर.

एनबीआइ ने मिठनपुरा स्थित सभागार में बज्जिका मैन्युस्क्रिप्ट पेंटिंग कार्यशाला व जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया. संयोजन संस्थापक व निदेशक आनंद कुमार ने किया. निफ्ट के लेदर डिजायन विभाग के प्रोजेक्ट हेड व विभागाध्यक्ष डॉ उज्ज्वल अंकुर ने भी संबोधित किया. उन्होंने तीन हजार वर्षों से अधिक पुरानी बज्जिका लोक-संस्कृति, इतिहास व बज्जिका कला की विशिष्टता के बारे में बताया. कहा कि बज्जिका मैन्युस्क्रिप्ट पेंटिंग पारंपरिक चित्रकला से भिन्न व विशिष्ट शैली है.

मुख्य अतिथि साहित्य की अनुवादक एसटीओ पदाधिकारी डॉ पद्मिनी भटनागर और एनबीटी के प्रशासनिक अधिकारी योगेश उपाध्याय व डॉ विश्वजीत मौजूद रहे. उन्होंने प्रकाशन क्षेत्र में संपादन की भूमिका को विद्यार्थियों को बताया.

साहित्यकार डाॅ भावना, हेमा सिंह, रंगकर्मी रमेश रत्नाकर, एनबीआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल फलक व डॉ विजयेश बज्जिका भाषा, साहित्य, कविता, कथा व नाटक में बज्जिका शैली के समृद्ध उपयोग पर बल दिया. मौके पर विभिन्न कॉलेजों के 335 से अधिक छात्र-छात्राएं रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel