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रोक के बाद भी कॉलेजों में किये गये भुगतान की देनी होगी रिपोर्ट

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रोक के बाद भी कॉलेजों में किये गये भुगतान की देनी होगी रिपोर्ट

:: कुलसचिव ने सभी अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्य को भेजा पत्र, पांच अगस्त तक रिपोर्ट देने का निर्देश

:: 5 मई को पत्र जारी कर सभी प्राचार्याें को वित्तीय कार्यों के लिए भुगतान करने से पूर्व अनुमति लेने का दिया था निर्देश

:: इसके बाद भी कॉलेजों में किया गया है लाखों रुपये का भुगतान, कहीं निर्माण कार्य तो कहीं अन्य मद में खर्च किये गये हैं पैसे

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय ने सभी अंगीभूत कॉलेजों में वित्तीय अनियमितताओं पर नकेल कसने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं. कुलपति के आदेश पर रजिस्ट्रार प्रो.समीर कुमार शर्मा ने सभी कॉलेजों के प्राचार्य को पत्र भेजा है. कहा है कि 5 मई से निलंबित वित्तीय शक्तियों की अवधि के दौरान वहां से किन मदों में पैसे खर्च किये गये हैं. सभी खर्चों का विस्तृत ब्योरा और अनुपालन रिपोर्ट 5 अगस्त तक अनिवार्य रूप से विश्वविद्यालय को भेज दें.

विश्वविद्यालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार कॉलेजों को वित्तीय लेनदेन का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा. इसमें परिचालन, संविदात्मक, आपातकालीन या तदर्थ सभी तरह के खर्च शामिल होंगे. प्राचार्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हाेने के बाद कुलपति ने सभी कॉलेजों को वित्तीय कार्यों पर रोक लगायी थी. कहा था कि विशेष परिस्थिति में विश्वविद्यालय से अनुमति लेने के बाद कोई कार्य किया जा सकता है. इस बीच विश्वविद्यालय को सूचना मिली है कि कॉलेजों में बिना विश्वविद्यालय से अनुमति लिए लाखों रुपये का भुगतान किया गया है. यहां तक कि निर्माण कार्य से भी पूर्व कुलपति से अनुमति नहीं ली गयी है. बिना टेंडर के भी काम कराया गया है. लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय ने रिपोर्ट तलब की है.

भुगतान से पूर्व अनुमति पत्र व घोषणा पत्र देना होगा :

कुलसचिव की ओर से भेजे गये पत्र में कहा गया है कि रिपोर्ट के साथ-साथ कॉलेजों को यह भी देना होगा कि उस कार्य को करने से पूर्व कुलपति से अनुमति ली गयी है या नहीं. यदि अनुमति ली गयी है तो उसका पत्र संलग्न करना है. हस्ताक्षर और मुहर लगा वर्ष-वार व्यय का सारांश, वाउचर-बिलों की मूल व सत्यापित प्रतियां, भुगतान का प्रमाण (बैंक पर्ची, यूटीआर संदर्भ), प्रत्येक लेनदेन के लिए बिहार वित्तीय नियम के अनुसार लिखित औचित्य देना होगा. इसके साथ ही प्राचार्यों को एक वैधानिक घोषणा पत्र भी प्रस्तुत करना होगा. इसमें यह पुष्टि करनी होगी कि सभी लेनदेन विश्वविद्यालय के मानदंडों के अनुसार थे. वित्तीय प्रक्रियाओं से कोई विचलन नहीं हुआ. सभी रिकॉर्ड ठीक से बनाए गए हैं और ऑडिट के अधीन हैं. जमा की गयी रिपोर्ट विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत देयता के साथ प्रस्तुत की गयी है.

कॉलेजों से भेजी गयी रिपोर्ट की होगी जांच :

विश्वविद्यालय की ओर से भेजे गये पत्र में कहा गया है कि कॉलेजों की ओर से प्रस्तुत की गई रिपोर्ट की जांच बिहार वित्तीय अधिनियम और ऑडिट प्रोटोकॉल के तहत की जाएगी. किसी भी वित्तीय अनियमितता, गलत रिपोर्टिंग या जानकारी छिपाने पर राशि की वसूली भी की जा सकती है. वहीं कार्रवाई की भी बात कही गयी है. पांच अगस्त तक रिपोर्ट की हार्ड कॉपी और डिजिटल प्रति जमा करना है. कहा गया है कि निर्देशों का पालन नहीं करने पर इसे जानबूझकर प्रशासनिक गैर-अनुपालन माना जाएगा.

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बीते पांच वर्षों में किये गये खर्च का भी मांगा गया हिसाब :

विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेजों से बीते पांच वर्षों में किये गये खर्च का भी हिसाब मांगा है. कहा है कि इस अवधि में कॉलेजों की ओर से जो राशि खर्च की गयी है. उसका पूरा विवरण उपलब्ध कराएं. विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.समीर कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार की ओर से रिपोर्ट मांगी गयी है. महालेखाकार की टीम विश्वविद्यालय पहुंची थी. इसके बाद कॉलेजों से जानकारी मांगी गयी है. कॉलेजों को दो पत्र भेजा गया है. पहले पत्र में पांच वर्षों की रिपोर्ट देनी होगी. वहीं दूसरे पत्र में वित्तीय अधिकारों पर रोक के बाद किये गये भुगतान की जानकारी मांगी गयी है.

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एडवांस लिये गये फंड की भी रिपोर्ट मांगी :

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, कॉलेजों, शिक्षकाें या कर्मचारियों को विश्वविद्यालय की ओर से जो एडवांस राशि दी गयी. उसके खर्च का भी हिसाब मांगा जाएगा. महालेखाकार की ओर से मांगी गयी रिपोर्ट के बाद विश्वविद्यालय ने इसका ब्योरा संग्रहित करना शुरू किया है. इस संबंध में भी सभी कॉलेजों, विभागों से रिपोर्ट मांगी जाएगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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