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Home बिहार मुजफ्फरपुर जिले में 5200 सर्विस व 22 हजार 85 साल से अधिक आयु के हैं वाेटर

जिले में 5200 सर्विस व 22 हजार 85 साल से अधिक आयु के हैं वाेटर

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जिले में 5200 सर्विस व 22 हजार 85 साल से अधिक आयु  के हैं वाेटर

मुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर

कुछ ऐसे वोटर्स भी होते हैं, जिन्हें घर से ही वोट डालने की सुविधा दी जाती है. वहीं कुछ वोटर्स को ये सुविधा भी मिलती है कि वो कहीं दूर बैठे ही पोस्टल वोटिंग कर सकते हैं. इसके लिए चुनाव पूर्व तैयारी करनी होती है. मुजफ्फरपुर व वैशाली लोकसभा में 5200 सर्विस वोटर और करीब 22 हजार 85 साल से अधिक आयु के मतदाता हैं जिनको पोस्टल बैलेट की सुविधा मिलेगी. इसी तरह विकलांग वोटर को भी कुछ शर्त के साथ यह सुविधा मिलती है. असम राइफल्स, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीमा सड़क संगठन, जीआरईएफ या केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के साथ भारत सरकार के अधीन आने वाले कर्मचारी सर्विस वोटर में आते हैं. क्षेत्र का रिटर्निंग ऑफिसर ऐसे वोटर्स को डाक मतपत्र भेजता है. इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम (ईटीपीबीएस) सेवा मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जाता है. इसमें उम्मीदवारों का नाम और चुनाव चिन्ह होता है. सर्विस वोटर को अपने पसंद के उम्मीदवार या पार्टी पर टिक करना होता है. इसके बाद इसे एक लिफाफे में सील करके भेजना होता है. मतगणना के दिन सबसे पहले इस बैलेट की गिनती होती है.

दिव्यांग व बुजुर्ग वोटर को भरना होगा फार्म

लोकसभा चुनाव में मतदान के लिए 85 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को घर से वोट डालने की सुविधा दी जा रही. इसके लिए फार्म 12 डी भरना होगा. बीएलओ के माध्यम से उनके पास फार्म पहुंच गया जा रहा है. बीएलओ के नहीं पहुंचने पर एप के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकेगा. इसमें वैसे दिव्यांग की सूची बनी है, जो 40 प्रतिशत अधिक दिव्यांग में आते है. यही नहीं, मतदाता सूची में उनका नाम पीडब्ल्यूडी वोटर के रूप में मार्क किया गया है. ऐसा नहीं होने पर पोस्टर बैलेट की पात्रता नहीं मानी जायेगी. बुजुर्ग और दिव्यांग वोटर के पास पोस्टल बैलेट लेकर दो बार बीएलओ जायेंगे, अगर वह मतदान के लिए दोनों बार उपलब्ध नहीं है तो उन्हें अनुपस्थित मान लिया जायेगा. बता दें कि जिले में 100 से अधिक आयु के 758 मतदाता है.

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