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Home बिहार मुंगेर मत्स्यजीवि सहयोग समिति की आपत्ति पर निगम ने रानी तालाब में वोटिंग संचालन का निविदा किया रद्द

मत्स्यजीवि सहयोग समिति की आपत्ति पर निगम ने रानी तालाब में वोटिंग संचालन का निविदा किया रद्द

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मत्स्यजीवि सहयोग समिति की आपत्ति पर निगम ने रानी तालाब में वोटिंग संचालन का निविदा किया रद्द

– संपत्ति मत्स्य विभाग की और राजस्व वसूल रहा नगर निगम मुंगेर

मुंगेर

मुंगेर में सरकारी संपत्ति को लेकर बड़ा प्रशासनिक सवाल खड़ा हो गया है. मामला मत्स्य विभाग की जमीन पर नगर निगम द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य और राजस्व वसूली से जुड़ा है. बताया गया कि जिस जमीन का स्वामित्व मत्स्य विभाग के पास है, उसी पर नगर निगम बिना आवश्यक एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लिए काम करा रहा है और लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. हद तो यह है कि संपत्ति मत्स्य विभाग की ओर नगर निगम मनोरंजन कर वसूल रहा है. इतना ही नहीं रानी तालाब में वोटिंग संचालन को लेकर निगम ने निविदा भी निकाल दिया. वैसे मत्स्यजीवि सहयोग समिति की आपत्ति पर निगम ने रानी तालाब में वोटिंग संचालन की निविदा को रद्द कर दिया है.

मत्स्य विभाग के रानी तालाब पर निगम ने जमाया कब्जा

किला परिसर में मत्स्य विभाग का दो बड़ा राजा-रानी तालाब है. मत्स्य विभाग परिसर में राजा तालाब है, जबकि ठीक उसके सामने रानी तालाब है. जो 9.8 एकड़ में फैला हुआ है. जिसका पट्टा मत्स्य विभाग ने मुंगेर प्रखंड मत्स्यजीवी सहयोग समिति लि. मुंगेर को दे रखा है. मत्स्य विभाग की इस संपत्ति पर पहले एमएलसी कोटे से तो बाद में बुड़कों ने करोड़ों रूपये से विकास कार्य किया. नगर निगम ने भी लाखों खर्च किया. यह सभी काम मत्स्य विभाग से बिना एनओसी के लिए ही कराया गया. इस तालाब के चारों ओर पथ वे बनाया गया. फुलों की बागवानी की गयी और बैठने की व्यवस्था है. लेकिन बिना किसी लिखित अनुमति के ही नगर निगम ने इसे अपने कब्जे में ले लिया है. इस रानी तालाब के पार्क में प्रवेश के लिए मात्र 10 रूपये प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया है. यह शुल्क नगर निगम द्वारा वसूल किया जाता है. यह सुंदर पार्क पर्यटकों और आम नागरिकों के घूमने के लिए सुबह 9:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है. इस दौरान प्रतिदिन यहां 500 से अधिक लोग घुमने आते है. जिनके शुल्क से निगम का खजाना भर रहा है और जिस मत्स्य विभाग की संपत्ति है और जिस मत्स्यजीवि सहयोग समिति को पट्टा दिया गया है. उसको फूटी कौड़ी नहीं मिल रहा है.

आखिरकार वोटिंग संचालन की बंदोबस्ती निगम को करना पड़ा रद्द

जानकारी के अनुसार नगर निगम ने मत्स्य विभाग के तालाब में वोटिंग संचालन के लिए 27 मार्च को अखबार में निविदा निकला था. जिसमें 20, 21 और 22 अप्रैल को निगम सभागार में खुली डाक से बंदोबस्ती होना था. लेकिन इससे पहले ही इस तालाब के पट्टेदार मुंगेर प्रखंड मत्स्यजीवी सहयोग समिति के महामंत्री छोटन सहनी ने मत्स्य विभाग एवं नगर निगम के नगर आयुक्त को पत्र लिखा कि पिछले 50 वर्षो से मत्स्य विभाग इसकी बंदोबस्ती करती आ रही है. जिसका सरकारी वार्षिक जमा राशि का राजस्व सरकारी खाता में जमा होता है. 2023-24 से 2026-2027 तक कुल चार वर्षों के लिए मुंगेर प्रखंड मत्स्यजीवी सहयोग समिति मुंगेर के साथ जिला मत्स्य पदाधिकारी सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी मुंगेर ने बंदोबस्त करते हुए परवाना आदेश मत्स्य पालन एवं शिकारमाही के लिए निर्गत किया. ऐसी परिस्थिति में यहां वोटिंग संचालन के लिए बंदोबस्ती की कार्रवाई अवैधानिक है. इसलिए इस बंदोबस्ती को रद्द किया जाय. इस पत्र को मत्स्य विभाग ने भी नगर निगम को फॉवर्डर कर दिया. सवाल उठते ही नगर निगम प्रशासन ने यू टर्न लिया और 17 अप्रैल को नगर आयुक्त हस्ताक्षरित एक सूचना निगम कार्यालय के दीवार पर साट दिया गया. जिसमें लिखा था कि वोटिंग संचालन के लिए डाक बंदोबस्ती आम सूचना को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है.

कहते हैं अधिकारी

जिला मत्स्य पदाधिकारी मनीष रस्तोगी ने बताया कि मत्स्य विभाग से किसी प्रकार का कोई एनओसी नगर निगम द्वारा नहीं लिया गया है. इससे अधिक हम कुछ भी नहीं बता सकते है. वरीय अधिकारियों से इस मुद्दे पर बात करें.

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