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रेल इंजन कारखाना ने हासिल की कई उपलब्धि तो कई मामले में पिछड़ा

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रेल इंजन कारखाना ने हासिल की कई उपलब्धि तो कई मामले में पिछड़ा

जमालपुर. चालू वर्ष 2024 में अब कुछदिन शेष हैं, इस दौरान जनवरी से लेकर अबतक रेल इंजन कारखाना जमालपुर ने कई उपलब्धियां हासिल की तो कुछ मामले में यह कारखाना फिसला भी. एक तरफ कारखाना को 8 व्हीलर डीजल इलेक्ट्रिक टावर कार और एचएचपी डीजल लोको का पहली बार कार्यभार मिला. वहीं वैगन पीओएच में कारखाना ने अबतक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. इतना ही नहीं 25 टन जैक का निर्माण कार्य एक बार फिर से जमालपुर कारखाना में होने लगा है. परंतु इसके साथ ही कारखाना को न तो इलेक्ट्रिक लोको के पीओएच का काम मिला और न ही जमालपुर कारखाना को 175 टन क्रेन का कार्यभार मिला.

वैगन पीओएच में कारखाना ने हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धि

रेल इंजन कारखाना जमालपुर में वैगन पीओएच एक महत्वपूर्ण कार्य है. सबसे ज्यादा यहां वैगन पीओएच का ही कामकाज होता है. जमालपुर कारखाना के रेलकर्मियों ने इस विधा में पारंगत होकर भारतीय रेल को निराश नहीं किया और वैगन पीओएच में लगातार बेहतर से बेहतर प्रदर्शन किया जा रहा है. 15 अगस्त को मुख्य कारखाना प्रबंधक द्वारा बताया गया था कि जुलाई 2024 तक औसतन प्रतिमाह 631 वैगन पीओएच किया जा रहा है, परंतु इस अंतराल में यहां के कार्यक्रमों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अब तक का सर्वाधिक प्रति महीना 702 वैगन पीओएच का रिकॉर्ड बनाया है. जो कारखाना के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

बीटीपीएन बैगन निर्माण के लिए पृष्ठभूमि तैयार

रेल इंजन कारखाना जमालपुर में बॉक्स एन एचएल कभी निर्माण किया जा रहा है. यहां 600 बॉक्स एन एचएल वैगन के निर्माण का कार्यभार मिला हुआ है. जिसमें से नवंबर महीने के अंततक 465 बॉक्स एन एचएल बैगन बनकर तैयार कर लिया गया. चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक जितने बॉक्स एन एचएल वेगन निर्माण का आर्डर मिला था. उसे पूरा कर लिया जाना तय है. इस बीच रेल इंजन कारखाना जमालपुर में बैगन क्रेन और जमालपुर जैक का निर्माण भी सुचारू रूप से चल रहा है.

एचएचपी डीजल लोको के पीओएच का मिला नया कार्यभार

रेल इंजन कारखाना जमालपुर को पहली बार एचएचपी डीजल लोको के पीओएच का कार्यभार मिला है. यहां पांच हाई हॉर्स पावर डीजल इंजन के ओवर हॉलिंग का कार्य भार मिला है. यहां के उम्दा कारीगरी को देखते हुए रेलवे ने जमालपुर को पहली बार यह कार्यभार सौंपा. इसमें से एक इंजन का ओवर होल्डिंग कार्य पूरा कर उसे पूरी तरह सर्विस के लिए तैयार कर दिया गया है. बताया गया कि हाई हॉर्स पावर डीजल इंजन का ओवर हॉलिंग भारत के दो कारखाने में ही संभव है. जिसमें से एक कारखाना दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली रेल कारखाना है तो दूसरा रेल इंजन कारखाना जमालपुर है. इतना ही नहीं जमालपुर जैक का निर्माण भारतीय रेल में केवल जमालपुर में ही किया जाता है. कोविड काल के बाद 25 टन जमालपुर जैक का आउटसोर्स करना शुरू कर दिया गया था, परंतु इस वर्ष जमालपुर कारखाना को फिर से जमालपुर जैक के निर्माण का कार्य भार मिल गया है. इतना ही नहीं अब 35 टन क्षमता वाले जमालपुर जैक का निर्माण कार्य भी कारखाना में आरंभ हो चुका है.

8 व्हीलर डीजल इलेक्ट्रिक टावर कार का निर्माण प्रारंभ

जमालपुर में पहले से फोर व्हीलर टावर कार का निर्माण किया जाता था. अब यहां एक व्हीलर टावर कार का भी निर्माण आरंभ हो गया है. जमालपुर कारखाना के क्रेन शॉप में इसका निर्माण कार्य लगातार जारी है. जबकि अगले वर्ष 2025 तक 8 व्हीलर 10 टावर कार का निर्माण का लक्ष्य निर्धारित है. परंतु कारखाना में वर्ष 2024 में ही अब तक 8 व्हीलर 2 टावर कार का निर्माण किया जा चुका है. इसका निर्माण भारतीय रेल के आईसीएस चेन्नई और पटियाला में किया जाता था. अब रेल इंजन कारखाना जमालपुर डीईटीसी 8 व्हीलर टावर कार के निर्माण कार्य से जुड़ गया है. जिसका स्पीड ट्रायल 13 नवंबर 2024 को सफलतापूर्वक किया जा चुका है.

स्क्रैप सेल में भी कारखाने ने लगाई ऊंची छलांग

रेल इंजन कारखाना ने पिछले एक वर्ष के दौरान जहां विभिन्न प्रकार की उपलब्धियां हासिल की है. वहीं स्क्रैप सेल में भी ऊंची छलांग लगाई है. बताया गया कि स्क्रैप सेल के मामले में वर्ष 2023 के जनवरी से दिसंबर तक लगभग 60 करोड़ की राशि अर्जित की गई थी, परंतु इस वर्ष इतने ही समय की तुलना में कारखाना ने अब तक लगभग 72 करोड़ की राशि अर्जित की है. इतना ही नहीं कारखाना प्रबंधन द्वारा चालू वर्ष के दौरान रेल कर्मियों की सुविधा को लेकर विभिन्न रेल कॉलोनी की सड़कों का भी निर्माण कराया गया. जबकि अंग्रेज के समय बनाए गए कारखाना के गेट संख्या 6 का मोडिफिकेशन कार्य भी पूरा कर लिया गया. साथ ही कारखाना ने पीपीपी मोड के तहत 3.7 मेगावाट और कैपेक्स मोड़ के तहत 260 किलो वाट के सौर ऊर्जा का उत्पादन आरंभ किया है. एलइडी लाइटिंग स्वचालित रूफटॉप वेंटीलेशन और ऊर्जा बचत वाले एयर कंडीशन एवं अन्य उपकरण लगाकर लगभग 30% विद्युत ऊर्जा की खपत कम की है.

कई मामले में कारखाना प्रबंधन फिसला

जमालपुर. रेल इंजन कारखाना ने पिछले 11 महीने के दौरान कई उपलब्धियां हासिल की, परंतु कई एक प्लेटफार्म है, जहां कारखाना प्रबंधन को अभी भी काम करना है. रेल इंजन कारखाना में अब तक वरीय अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद इलेक्ट्रिक लोको का पीओएच कार्य आरंभ नहीं हो पाया. साथ ही रेल इंजन कारखाना जमालपुर में 175 टन क्रेन का भी निर्माण कार्य आरंभ नहीं हो पाया. जबकि बैगन निर्माण के लिए कारखाना में मानक मापदंड के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं किया जा सका है और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही काम किया जा रहा है. डब्लयूआरएस-5 शॉप को पेंट शॉप बनाया गया है. परंतु वहां भी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है. जिस पर रेल इंजन कारखाना प्रबंधन को ध्यान देने की जरूरत है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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