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Home बिहार मुंगेर करोड़ों के वातानुकूलित प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड में चल रही ओपीडी, पुराने व सीलन भरे वार्डों में गर्मी से मरीज परेशान

करोड़ों के वातानुकूलित प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड में चल रही ओपीडी, पुराने व सीलन भरे वार्डों में गर्मी से मरीज परेशान

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करोड़ों के वातानुकूलित प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड में चल रही ओपीडी, पुराने व सीलन भरे वार्डों में गर्मी से मरीज परेशान

गर्मी से बचने के लिए लोग बरामदे पर बैठ कर बिताते हैं समय

मुंगेर

भीषण गर्मी व उमस के बीच लोगों को वैसे तो घरों में भी राहत नहीं मिल रही है. ऐसे में सदर अस्पताल में 70 करोड़ की लागत से बने प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड की जगह दस्त, डायरिया व हीटवेव पीड़ित मरीज पुराने व सीलन भरे वार्डों में इलाज को मजबूर हैं. जहां गर्मी से बचने के लिए अधिकांश मरीज व उनके परिजन वार्ड के बाहर बरामदे के जमीन पर बैठकर समय गुजार रहे हैं. वहीं वातानुकूलित प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड में केवल ओपीडी का संचालन ही हो रहा है.

70 करोड़ की लागत से हुआ है प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड का निर्माण

सरकार की ओर से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 70 करोड़ खर्च कर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस तथा पूर्ण वातानुकूलित 100 बेड के प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड का निर्माण कराया गया था. इसका पिछले साल ही मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया था, लेकिन इस अत्याधुनिक व वातनुकूलित प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड में मरीजों को इलाज करने के लिए भर्ती किये जाने की जगह स्वास्थ्य विभाग केवल ओपीडी का संचालन कर रहा है. जबकि यहां न केवल अलग-अलग कई वार्ड बनाये गये हैं, बल्कि इन वार्डों में अलग-अलग नर्सिंग स्टेशन व डॉक्टर चेंबर भी बने हैं. इस प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड में सभी सुविधाएं एक ही जगह दी गयी है. इसके बावजूद इस अत्याधुनिक व वातानुकूलित 100 बेड वाले प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड का लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है.

उसम व सीलन भरे पुराने वार्डों में इलाज को मजबूर मरीज

इन दिनों भीषण गर्मी व उमस के कारण सदर अस्पताल में दस्त, डायरिया, लू व हीट वेव के मरीजों की संख्या काफी अधिक बढ़ गयी है. इसमें अस्पताल प्रबंधन द्वारा दस्त व डायरिया के मरीजों को पुरुष वार्ड के बरामदे पर ही भर्ती किया जा रहा है. जबकि हीट वेव व लू के मरीजों के लिए पुराने परिवार नियोजन वार्ड में ही एसी लगाकर 10 बेड का हीट वेव वार्ड बना दिया गया है. हाल यह है कि पुरुष व महिला वार्ड समेत एमसीएच व प्रसव वार्ड के पुराने भवनों में भर्ती मरीज गर्मी व उमस से बचने के लिए पूरे दिन खुले बरामदे की जमीन पर बैठकर अपना समय बिताते हैं. रात के समय वार्ड में पंखे की गर्म हवाओं से बचने के लिए मरीज व उनके परिजन बरामदे पर ही सोते नजर आते हैं.

वार्डों में परिजनों के लिए बैठने तक की नहीं है व्यवस्था

सदर अस्पताल में वैसे तो मिशन-60 के दौरान ही सभी वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों के लिए वार्ड के बाहर बैठने की व्यवस्था किये जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसकी व्यवस्था नहीं की गयी. इसके कारण मरीज के परिजनों को या तो वार्ड के बाहर बरामदे की जमीन पर बैठना पड़ता है या खुद मरीज के ही बेड पर ही बैठना पड़ता है. यह हाल पुरुष, महिला, प्रसव समेत लगभग सभी वार्डों में है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि 100 बेड के मॉडल अस्पताल में सभी प्रकार की व्यवस्था होगी. हालांकि प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड में अलग-अलग वार्ड शिफ्ट करना मुश्किल है. इसके लिए नर्स व चिकित्सक की भी अलग से व्यवस्था करनी होगी. जबकि जिले में चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी की कमी है. ऐसे में तत्काल प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल में ओपीडी संचालित की जा रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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