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Home बिहार मुंगेर बदहाली. एक पतले कंबल के भरोसे सदर अस्पताल के वार्डों में पूस की रात काट रहे मरीज

बदहाली. एक पतले कंबल के भरोसे सदर अस्पताल के वार्डों में पूस की रात काट रहे मरीज

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बदहाली. एक पतले कंबल के भरोसे सदर अस्पताल के वार्डों में पूस की रात काट रहे मरीज

– महिला वार्ड में नहीं है रूम हीटर की व्यवस्था, मेल वार्ड का रूम हीटर है खराब

– टूटे दरवाजे और खिड़कियों से पूस की रात में ठंडी हवाएं कर रही परेशान

फोटो कैप्शन – 6. बिना रूम हीटर का महिला वार्ड.

7. मेल वार्ड का रूम हीटर है खराब.

प्रतिनिधि, मुंगेर

पूस की रात लोगों से घरों में मोटे रजाई और कंबलों में भी नहीं कट रहे हैं. ऐसे में सदर अस्पताल के वार्डों में मरीज मात्र एक पतले कंबल के भराेसे पूस की रात काट रहे हैं. पुरुष वार्ड में रूम हीटर तो है, लेकिन वह केवल दिखावे के लिये ही है. जबकि महिला वार्ड में मरीजों को तो वो भी नसीब नहीं हो रहा है. ऐसे में पूस की रात में हाड़ कंपा देने वाले ठंड के बीच वार्डों के जर्जर दरवाजे व खिड़कियों से आ रही शीतलहर मरीजों को परेशान कर रही है.

अस्पताल के जर्जर वार्डों में एक कंबल के भरोसे रात काट रहे मरीज

भले ही साल 2022 में 1.98 करोड़ की लागत से सदर अस्पताल का जीर्णाेद्धार मिशन-60 के तहत किया गया, लेकिन अस्पताल के जर्जर वार्डों में मात्र एक कंबल के भरोसे मरीजों को पूस की ठंडी रात काटनी पड़ रही है. वार्ड में भर्ती ऐसी मरीज, जो घरों से कंबल लाते हैं, वैसे मरीज तो वार्डों में किसी प्रकार रात काट लेते हैं, लेकिन सबसे बड़ी मुसीबत गरीब और नि:सहाय के लिये होती है. जिनके लिये सदर अस्पताल के चादर जैसे पतले कंबल में रात काटना मुश्किल हो रहा है. हाल यह है कि सुविधाओं के अभाव में कई मरीज सुबह तो भर्ती होते हैं, लेकिन रात होते ही घर चले जाते हैं. इस कारण खुद अस्पताल पर लामा के मामलों का बोझ बढ़ता जा रहा है.

महिला वार्ड में तो मरीजों को हीटर भी नहीं है नसीब

कहने को तो अस्पताल के वार्डों में रूम हीटर लगा है, लेकिन यहां लगा रूम हीटर 10 से 12 बेड वाले वार्ड को गर्म करने के लिये नाकाफी है. पुरुष सर्जिकल वार्ड में लगा दो हीटर तो चालू है, लेकिन मेडिकल वार्ड में लगे दो हीटर में एक ही चल रहा है. जबकि महिला वार्ड में तो मरीजों को पूस की रात में भी दिखावे वाले रूम हीटर भी नसीब नहीं है. इस कारण यदि मरीजों को अस्पताल में इस ठंड में इलाज के लिये आना हो तो इसके लिये खुद ही व्यवस्था करनी होगी, क्योंकि एक कंबल के सहारे तो अस्पताल के पुराने और सीलन वाले वार्डों में पूस की रात काटना मुश्किल ही है.

टूटे दरवाजे और खिड़कियों से पूस की रात में ठंडी हवाएं कर रही परेशान

सदर अस्पताल के वार्डों में मरीजों के लिये बड़ी मुसीबत रात के समय टूटे दरवाजे तथा खिड़कियों से आ रही शीतलहर से बचना है, क्योंकि टूटे दरवाजे और खिड़कियों से पूस की रात में आ रही ठंडी हवा मरीजों को मुंशी प्रेमचंद्र के पूस की रात कहानी की याद दिला देती है. सबसे बड़ी मुसीबत तो पुरुष वार्ड के बरामदे पर बने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के लिये होती है. जिसे सीधे ठंडी हवाओं का सामना करना पड़ता है. जो अस्पताल के पतले कंबल के सहारे काटना तो मुश्किल ही है.

कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक

सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ रमन कुमार ने बताया कि कुछ हीटर खराब हो गये हैं. जिसे ठीक कराया जा रहा है. उसे वार्डों में लगा दिया जायेगा. यदि मरीजों को दो कंबल की आवश्यकता होती है तो वो परिचारिकाओं से ले सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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