[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार मुंगेर मुंगेर का 500 साल पुराने पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर की क्या है खासियत? यहां पूरी होती है हर मनोकामना, इसलिए कहते हैं ‘मिनी देवघर’

मुंगेर का 500 साल पुराने पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर की क्या है खासियत? यहां पूरी होती है हर मनोकामना, इसलिए कहते हैं ‘मिनी देवघर’

0
मुंगेर का 500 साल पुराने पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर की क्या है खासियत? यहां पूरी होती है हर मनोकामना, इसलिए कहते हैं ‘मिनी देवघर’
पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर

हवेली खड़गपुर से रतन झा की रिपोर्ट

Aaj Ka Darshan: सावन का महीना शुरू होते ही बिहार के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है. लेकिन मुंगेर में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर भी है, जहां लोग सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि अपनी अधूरी मनोकामनाओं को लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर प्रार्थना भगवान शिव जरूर सुनते हैं.

मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में स्थित पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर सदियों से आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. पांच मुख वाले भगवान शिव के इस दुर्लभ स्वरूप के कारण यह मंदिर पूरे इलाके में खास पहचान रखता है. यही वजह है कि इसे पंचवदन स्थान और ‘लघु देवघर’ के नाम से भी जाना जाता है.

आखिर क्यों कहा जाता है इसे पंचमुखी नाथ महादेव?

मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर और हवेली खड़गपुर मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है. मंदिर नगर की दक्षिण-पूर्वी सीमा पर स्थित है और यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.

भगवान शिव की पांच मुख वाली प्रतिमा के कारण इस मंदिर का नाम पंचमुखी नाथ महादेव पड़ा. स्थानीय लोग इसे पंचबदन महादेव मंदिर और पंचवदन स्थान के नाम से भी जानते हैं. आसपास के दर्जनों गांवों के अलावा दूर-दराज के जिलों से भी श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं.

पटना: बीएसएससी अभ्यर्थियों ने लंबित परीक्षाओं की तिथि जारी करने की मांग को लेकर आयोग कार्यालय में प्रदर्शन किया. 10-15 दिन में तारीख नहीं आने पर महाआंदोलन की चेतावनी दी.

Aaj Ka Darshan सावन में क्यों बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़?

सावन का महीना आते ही इस मंदिर की रौनक कई गुना बढ़ जाती है. बड़ी संख्या में कांवरिये सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर यहां पहुंचते हैं और बाबा पंचमुखी नाथ का जलाभिषेक करते हैं.

स्थानीय मान्यता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ बाबा का जलाभिषेक करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही विश्वास हर साल हजारों श्रद्धालुओं को इस मंदिर तक खींच लाता है.

‘लघु देवघर’ के नाम से भी है प्रसिद्ध

बाबा बैद्यनाथ धाम की तरह यहां भी सावन में जलाभिषेक की विशेष परंपरा है. इसी वजह से पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर को स्थानीय लोग ‘लघु देवघर’ भी कहते हैं.

श्रद्धालुओं का मानना है कि जो लोग किसी कारणवश देवघर नहीं जा पाते, वे यहां जल चढ़ाकर भी भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करते हैं. इसी आस्था ने इस मंदिर को पूरे क्षेत्र में विशेष पहचान दिलाई है.

बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

15वीं शताब्दी का बताया जाता है मंदिर का इतिहास

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में एक राजा द्वारा कराया गया था. समय के साथ यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं रहा, बल्कि इलाके की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन गया.

आज भी यह मंदिर मुंगेर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. सावन हो या महाशिवरात्रि, यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. दूर-दूर से आने वाले भक्त भगवान शिव के दर्शन कर सुख, शांति और मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं.

इसे भी पढ़ें: अगले 72 घंटे के लिए बिहार के इन जिलों के लोग हो जाएं सावधान, IMD ने जारी किया डबल अलर्ट

बिहार के इन दो जिलों में जमीन के नीचे बनेगी ब्लास्ट-प्रूफ रेल लाइन, जंग में बंकर का करेगी काम

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel