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Home बिहार मुंगेर सदर अस्पताल के लिए ”हाथी का दांत” बना ऑक्सीजन प्लांट

सदर अस्पताल के लिए ”हाथी का दांत” बना ऑक्सीजन प्लांट

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सदर अस्पताल के लिए ”हाथी का दांत” बना ऑक्सीजन प्लांट

मुंगेर. मुंगेर सदर अस्पताल को कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी से निबटने के लिए सरकार द्वारा लगभग 32 करोड़ की लागत से एक हजार एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट दिया गया, लेकिन मेंटनेंस और तकनीशियन के अभाव में वर्तमान में यह ऑक्सीजन प्लांट सदर अस्पताल के लिए केवल हाथी का दांत बनकर रह गया है, जबकि वार्डों में मरीज ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और सिलेंडर के भरोसे हैं. जहां कई बार ऑक्सीजन की कमी होने से खुद अस्पताल प्रबंधन को न केवल मरीजों के हंगामे का समाना करना पड़ता है, बल्कि कई बार मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ती है.

दो सप्ताह से खराब पड़ा है ऑक्सीजन प्लांट

सदर अस्पताल में पिछले दो सप्ताह से ऑक्सीजन प्लांट खराब पड़ा है. ऐसा नहीं है कि प्लांट में कोई बड़ी खराबी है, क्योंकि दो सप्ताह पहले केवल ऑक्सीजन प्लांट का मेन स्विच बोर्ड जल गया है, जिसके कारण प्लांट बंद पड़ा है. हद तो यह है कि जनवरी 2022 में राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा ऑक्सीजन प्लांट संचालन के लिए तकनीशियन दिया गया था. जिसकी संविदा अवधि साल 2025 में ही समाप्त ही समाप्त हो चुकी है. जिसके कारण सुचारू रूप से ऑक्सीजन प्लांट का न तो संचालन हो पा रहा है और न ही ऑक्सीजन के मानक गुणवत्ता की जांच हो पा रही है.

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और सिलिंडर के भरोसे मरीज

एक ओर जहां सदर अस्पताल में एक हजार एमपीएल क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट मेंटनेंस व कर्मी के अभाव में बंद पड़ा है. वही वार्डों में मरीज ऑक्सीजन कंसंट्रेटर या ऑक्सीजन सिलिंडर के भरोसे हैं. यह हाल तब है, जब लगभग 32 करोड़ की लागत से बने मॉडल अस्पताल में मरीजों के बेड तक ऑक्सीजन पाइपलाइन तक की व्यवस्था की गयी है. इतना ही नही कई बार ऑक्सीजन की कमी के कारण खुद अस्पताल प्रबंधन को मरीजों के हंगामे का सामना करना पड़ता है, बल्कि कई बार ऑक्सीजन सही समय पर नहीं मिल पाने के कारण मरीज अपनी जान भी गंवा चुके हैं.

ऑक्सीजन प्लांट में जो खराबी आयी है, उसे ठीक करने का निर्देश अस्पताल प्रबंधन को दिया गया है. वहीं तकनीशियन के लिए संबंधित एजेंसी से बात की गयी है.

डॉ राजू, सिविल सर्जनB

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