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Home बिहार मुंगेर वेतन व पेंशन लेने का मामला : न जांच कमेटी बनी, न ही शिकायत ही हुई जांच

वेतन व पेंशन लेने का मामला : न जांच कमेटी बनी, न ही शिकायत ही हुई जांच

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वेतन व पेंशन लेने का मामला : न जांच कमेटी बनी, न ही शिकायत ही हुई जांच

मुंगेर. एक ओर जहां मुंगेर विश्वविद्यालय के सीनेटर सह शिक्षक ही विश्वविद्यालय पर न केवल वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगा रहे हैं, बल्कि इसके लिए राजभवन से शिकायत भी कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर कॉलेज में कार्यरत एक शिक्षक द्वारा विश्वविद्यालय से पूर्ण वेतन लेने के साथ अपने पूर्व के कार्य से पेंशन लिए जाने की शिकायत मामले में न तो विश्वविद्यालय द्वारा अबतक जांच कमेटी बनायी गयी और न ही शिकायत की जांच की गयी. हद तो यह है कि मामले की जांच करने की जगह विश्वविद्यालय द्वारा कार्यालय आदेश निकालकर खानापूर्ति कर दी गयी है.

बता दें कि एमयू को बीते दिनों कोशी कॉलेज खगड़िया में कार्यरत एक शिक्षक द्वारा अपने पूर्व के कार्य स्थल से पेंशन लेने के साथ विश्वविद्यालय से पूर्ण वेतन लिए जाने की शिकायत प्राप्त हुई, लेकिन शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय न तो मामले की जांच के लिए कोई कमेटी बनायी और न ही शिकायत मिलने पर कोई जांच की गयी. हद तो यह रही कि नियमानुसार वेतन व पेंशन एक साथ लेने जैसे गंभीर मामले में भी विश्वविद्यालय द्वारा केवल एक कार्यालय आदेश निकालकर मामले में खानापूर्ति कर दी गयी. यह हाल तब है, जब खुद विश्वविद्यालय अपने कार्यालय आदेश में यह मान रहा है कि इस तरह का कार्य करना और जानकारी छिपाना गैरकानूनी कार्य है. इसके बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा इस मामले में केवल कार्यालय आदेश निकालकर छोड़ देना खुद विश्वविद्यालय के कार्य प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है.

खुद के आदेशों का ही नहीं हो रहा पालन

मुंगेर. एमयू द्वारा बीते दिनों विश्वविद्यालय व कॉलेजों से दी जाने वाली सूचनाओं को लेकर एक कार्यालय आदेश भी जारी किया गया. जिसमें कहा गया कि प्रेस, मीडिया को कोई भी सूचना या बयान केवल पीआरओ कार्यालय द्वारा दिया जायेगा, जबकि बिना पीआरओ कार्यालय के सूचना या बयान देने वाले पदाधिकारी, प्राचार्य व शिक्षकों पर कार्रवाई की जायेगी, लेकिन एमयू के अधिकारी इस आदेश से अलग खुद ही अलग-अलग वाट्सअप ग्रुप संचालित कर रहे हैं. जिसमें प्रतिदिन कई प्रकार की सूचनाएं डाली जा रही है. हद तो यह है कि इस ग्रुप में खुद कुलपति और कुलसचिव के साथ कई अधिकारी भी हैं, जबकि इस वाट्सअप ग्रुप में कई प्रेस, मीडिया के साथ विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले जिले से बाहर के लोग भी जुड़े हैं. ऐसे में अब खुद विश्वविद्यालय के कार्यालय आदेशों का कितना पालन विश्वविद्यालय के अधिकारी कर रहे हैं. इसका अंदाजा इन विभिन्न वाट्सअप ग्रुप को देख कर ही लगाया जा सकता है.

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