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Home बिहार मुंगेर Munger Special Report: सड़क हादसों के शिकार परिवार मुआवजे के लिए तरसे, जागरूकता की कमी भारी

Munger Special Report: सड़क हादसों के शिकार परिवार मुआवजे के लिए तरसे, जागरूकता की कमी भारी

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Munger Special Report: सड़क हादसों के शिकार परिवार मुआवजे के लिए तरसे, जागरूकता की कमी भारी

Munger Special Report, वीरेंद्र कुमार: मुंगेर जिले से एनएच-80, एनएच-333 और एनएच-333 बी गुजरा है. स्टेट हाइवे के अतिरिक्त भी सड़कों का जाल बिछा हुआ है. इस पर हर साल लगभग 80 से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है और 200 से अधिक लोग घायल होते हैं. पर, दुर्घटना की तुलना में लाभ प्राप्त करनेवालों की संख्या काफी कम है, क्योंकि लोगों में जागरूकता का अभाव है. विभाग अथवा पुलिस प्रशासन का मदद करना तो दूर, हिट एंड रन मामले में पीड़ित परिवार को जो मुआवजा मिलता है, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं देते. इसके कारण कई परिवार
इसके लाभ से वंचित रह जाते हैं.

108 मामलों में मात्र 66 को मिला लाभ

परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो कुल 108 मामले विभाग के पास आये. इसमें जांच-पड़ताल के बाद 74 आवेदनों को जीआइसी मुंबई को भेजा गया है. इसमें 66 मामलों का निष्पादन हो पाया है. इसमें 62 मृतक के आश्रितों को 2-2 लाख रुपये इस योजना के तहत मुआवजा राशि के तौर पर भुगतान हो चुका है, जबकि मात्र चार घायलों को ही प्रति घायल 50 हजार के हिसाब से मुआवजा राशि का भुगतान किया जा सका है, अभी भी 42 मामले लंबित हैं.

जागरूकता का अभाव उत्पन्न कर रही समस्या

हादसों की संख्या और मुआवजे के मामले में काफी फर्क है. इसके पीछे एक कारण यह है कि विक्टिम और मृतक के परिजनों को योजना के बारे में जानकारी का अभाव है. कई मामलों में हिट एंड रन में मृतक के परिजनों को मुआवजा इसलिए नहीं मिल पाया है, क्योंकि कई मामलों में एफआइआर दर्ज नहीं हुई, तो कई मामलों में मृतक का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है.

कुछ ऐसे मामले हैं, जिसमें घायलों को परिजन इलाज के लिए इधर-उधर लेकर चले जाते हैं, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो जाती है. पर, परिजन उनका पोस्टमार्टम नहीं कराते और शव का अंतिम संस्कार कर देते हैं. इसके कारण ऐसे मृतकों के परिजनों को हिट एंड रन का लाभ नहीं मिल पाता है.

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिट एंड रन केस में पुलिस पीड़ित को निश्चित तौर पर मुआवजे की योजना के बारे में सूचित करे और इसका लाभ पीड़ित कैसे ले सकते हैं, इसके बारे में उन्हें जानकारी दे.

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ट्रिब्यूनल ने दिलाया छह पीड़ित परिवारों को लाभ

मुंगेर में 7 फरवरी, 2025 को किला परिसर में बिहार मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण का प्रमंडलीय कार्यालय खोला गया है. यहां मुंगेर प्रमंडल के छह जिलाें मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, बेगूसराय व खगड़िया के नन हिट एंड रन मामलों की सुनवाई हो रही है.

मिली जानकारी के अनुसार, दो माह में ट्रिब्यूनल ने छह मृतक व घायल के परिवारों को सुनवाई कर इंश्योरेंस कंपनी से लाभ दिलाया. विदित हो कि नन हिट एंड रन से मौत पर न्यूनतम पांच लाख तथा घायल की अवस्था में न्यूनतम 2.50 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है.

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आवेदनों का ठीक से हो रहा निबटारा

जिला परिवहन पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार अलवेला ने कहा कि मुंगेर जिले में आवेदनों का ठीक से निबटारा हो रहा है. अब तक 108 में से 66 पीड़ित पक्ष को हिट एंड रन मामलों में इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजा दिलाया जा चुका है. कई मामले इंश्योरेंस ऑफिस में लंबित हैं. कुछ आवेदनों की जांच हो रही है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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