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Home बिहार मुंगेर किऊल-जमालपुर डेमू की लेटलतीफी से बढ़ी यात्रियों की परेशानी, रोज घंटों इंतजार को मजबूर लोग

किऊल-जमालपुर डेमू की लेटलतीफी से बढ़ी यात्रियों की परेशानी, रोज घंटों इंतजार को मजबूर लोग

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किऊल-जमालपुर डेमू की लेटलतीफी से बढ़ी यात्रियों की परेशानी, रोज घंटों इंतजार को मजबूर लोग
किऊल-जमालपुर पैसेंजर ट्रेन.

जमालपुर (मुंगेर) से विजय गुप्ता की रिपोर्ट

Munger News : किऊल-जमालपुर रेलखंड पर रात में संचालित होने वाली 73425/73426 डेमू पैसेंजर ट्रेन के लगातार विलंब से चलने के कारण रेल यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में मजदूर, विद्यार्थी, छोटे व्यवसायी और नौकरीपेशा लोग इस ट्रेन पर निर्भर रहते हैं, लेकिन अनियमित परिचालन के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है. कई बार ट्रेन अपने निर्धारित समय से दो से तीन घंटे की देरी से गंतव्य तक पहुंचती है, जिससे यात्रियों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो रही है.

रेलवे समय-सारिणी के अनुसार 73426 डाउन डेमू ट्रेन किऊल से रात 10:30 बजे रवाना होकर 11:45 बजे जमालपुर पहुंचती है. वहीं 73425 अप डेमू जमालपुर से रात 8:00 बजे खुलकर 9:25 बजे किऊल पहुंचती है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है. पिछले कई दिनों के परिचालन रिकॉर्ड पर नजर डालें तो अधिकांश दिनों में ट्रेन निर्धारित समय से काफी विलंब से चली है. 21 और 22 जून को यह ट्रेन रात एक बजे के बाद जमालपुर पहुंची, जबकि 25 जून को तो करीब ढाई घंटे की देरी से गंतव्य पर पहुंची. हालांकि 24, 27 और 29 जून को ट्रेन अपेक्षाकृत समय पर चली, लेकिन अधिकांश दिनों में लेटलतीफी यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बनी रही.

किऊल से जमालपुर आनेवाली अंतिम पैसेंजर ट्रेन

यह ट्रेन किऊल की ओर से जमालपुर आने वाली अंतिम पैसेंजर ट्रेन है. इसके माध्यम से कजरा, अभयपुर, मसूदन, धरहरा, दशरथपुर और जमालपुर के बीच प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं. ट्रेन के देर से पहुंचने के कारण यात्रियों को आधी रात तक स्टेशन पर इंतजार करना पड़ता है. कई बार ट्रेन रात एक बजे तो कभी दो बजे तक जमालपुर पहुंचती है, जिससे विशेषकर महिला यात्रियों और बुजुर्गों को काफी असुविधा होती है.

दैनिक रेल यात्री सखी चंद प्रसाद ने बताया कि वे धरहरा से रोज सुबह डेमू ट्रेन पकड़कर जमालपुर मजदूरी करने आते हैं. रात में ट्रेन के देर से पहुंचने के कारण घर लौटते-लौटते 11 से 12 बज जाते हैं. ऐसे में सुबह जल्दी उठकर फिर ट्रेन पकड़ना और पूरे दिन मेहनत करना बेहद कठिन हो जाता है. वहीं दशरथपुर निवासी सुनील ने कहा कि दिनभर की मजदूरी 500 से 600 रुपये होती है, लेकिन ट्रेन अधिक लेट होने पर मजबूरी में ऑटो से जाना पड़ता है, जिसके लिए चालक 300 रुपये तक किराया मांगते हैं. इससे उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है.

कजरा की संगीता और अन्य महिला यात्रियों ने बताया कि वे सामान बेचकर इसी ट्रेन से घर लौटती हैं. ट्रेन के देर से आने के कारण कई बार रात एक या दो बजे घर पहुंचना पड़ता है. देर रात सुनसान रास्तों से घर जाना उनके लिए असुरक्षित महसूस होता है. उन्होंने रेलवे प्रशासन से ट्रेन का परिचालन समय पर सुनिश्चित करने की मांग की है.

लिंक रैक सिस्टम है मुख्य वजह

जानकारों के अनुसार इस समस्या की मुख्य वजह लिंक रैक सिस्टम है. बताया जाता है कि भागलपुर से आने वाली डेमू का वही रैक जमालपुर से खगड़िया जाता है. खगड़िया से लौटने के बाद उसी रैक का उपयोग जमालपुर से किऊल जाने वाली 73425 अप डेमू में किया जाता है. ऐसे में यदि किसी एक ट्रेन के परिचालन में देरी होती है तो उसका सीधा असर अगली ट्रेनों पर पड़ता है और पूरा परिचालन प्रभावित हो जाता है.

यात्रियों का कहना है कि रेलवे को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए. यदि लिंक रैक सिस्टम में सुधार किया जाए या अतिरिक्त रैक की व्यवस्था की जाए तो इस महत्वपूर्ण पैसेंजर ट्रेन का संचालन समय पर हो सकेगा. यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से नियमित और समयबद्ध परिचालन सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि इससे हजारों दैनिक यात्रियों को राहत मिलेगी.

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