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डिजिटल दावे के बीच एमयू के कॉलेजों का वेबसाइट दो साल बाद भी अपडेट नहीं

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डिजिटल दावे के बीच एमयू के कॉलेजों का वेबसाइट दो साल बाद भी अपडेट नहीं

2023 में 1.70 करोड़ की लाख की लागत से एजेंसी द्वारा बनाया गया कॉलेजों का वेबसाइट मुंगेर. कोरोना काल के बाद से मुंगेर विश्वविद्यालय प्रशासन खुद को डिजिटल करने को लेकर कई बड़े दावे करता रहा है. वहीं डिजिलट शैक्षणिक प्रक्रिया संचालन के लिये विश्वविद्यालय प्रत्येक साल लाखों रूपये भी खर्च कर रही है. लेकिन एमयू के 17 अंगीभूत कॉलेजों का ऑफिशियल वेबसाइट दो साल बाद भी बदहाल है. 2023 में 1.70 करोड़ की लागत से बनाये गये कॉलेजों का वेबसाइट अबतक अपडेट नहीं है. यह हाल तब है, जब डिजिटल समय में विद्यार्थी किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में नामांकन से पहले उसके वेबसाइट से सभी जानकारी प्राप्त करते हैं, लेकिन एमयू के कॉलेजों के बदहाल वेबसाइट के कारण ही प्रत्येक सत्र में नामांकन के दौरान 50 प्रतिशत सीटें खाली रह जाती है. दो साल पूर्व 1.70 करोड़ की लागत से बनाया गया था कॉलेजों का नया वेबसाइट साल 2023 में राजभवन द्वारा सभी विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों का वेबसाइट दुरूस्त करने के लिये एजेंसी निर्धारित की गयी थी. जिस एजेंसी द्वारा 2023 में एमयू के 17 कॉलेजों के लिये वेबसाइट बनाया गया. इसके लिये विश्वविद्यालय द्वारा 10 लाख प्रत्येक कॉलेज के हिसाब से एजेंसी को भुगतान किया. जो कुल 1.70 करोड़ रूपये था. एजेंसी द्वारा विश्वविद्यालय व कॉलेजों को वेबसाइट उपलब्ध करा दिया गया. साथ ही इसे अपडेट करने के लिये संबंधित कॉलेज में एक-एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया गया. समय-समय पर कॉलेज का वेबसाइट अपलोड करना था. दो साल बाद भी कॉलेजों का वेबसाइट नहीं है अपडेट एमयू प्रशासन ने भले ही कॉलेजों का वेबसाइट नया बना दिया हो, लेकिन इसके दो साल बाद भी कॉलेजों का वेबसाइट न तो अपडेट है. न ही सही से जानकारी विद्यार्थियों को उपलब्ध करा पा रहा है. हद तो यह है कि कॉलेजों के वेबसाइट का लिंक विश्वविद्यालय के अधिकारिक वेबसाइट पर है, लेकिन इसमें से अधिकांश कॉलेजों का वेबसाइट खुलता तक नहीं है. इसके अतिरिक्त सभी कॉलेजों के वेबसाइट पर न तो वहां के प्राचार्य और शिक्षकों का कोई डाटा उपलब्ध है और न ही कॉलेज में पढ़ाये जाने वाले विषयों से संबंधित जानकारी तथा उनका सेलेबस. कॉलेजों से दूर हो रहे विद्यार्थी बता दें कि डिजिटल समय में किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज से संबंधित जानकारी विद्यार्थी नामांकन से पहले उन विश्वविद्यालय या कॉलेज के वेबसाइट से प्राप्त करते हैं, लेकिन खुद को डिजिटल बनाने का दावा करने वाले एमयू के कॉलेजों के वेबसाइट अपडेट नहीं होने का असर इसके नामांकन पर भी पड़ रहा है. बता दें कि सूचनाओं के अभाव में विद्यार्थी एमयू के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में नामांकन से कतरा रहे हैं. जिसके कारण ही प्रत्येक सत्र में नामांकन के दौरान कॉलेजों की 50 प्रतिशत सीटें रिक्त रह जा रही हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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