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मोबाइल वेटनरी यूनिट घर-घर जाकर बीमार मवेशियों की कर रही इलाज

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मोबाइल वेटनरी यूनिट घर-घर जाकर बीमार मवेशियों की कर रही इलाज

राहत. पांच मोबाइल वेटनरी यूनिट एंबुलेंस, पर चिकित्सक की कमी से सेवा प्रभावित, प्रतिनिधि, मुंगेर. डोर स्टेप पशु चिकित्सा सेवा की शुरूआत सितंबर महीने से ही की गयी है, लेकिन उस समय सभी 9 प्रखंडों के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन नहीं आया था. हालांकि, दिसंबर महीने में सभी मोबाइल वेटनरी यूनिट वाहन मुंगेर को उपलब्ध करा दिया गया. वाहन आते ही सभी प्रखंडों में यह सेवा बहाल कर दी गयी, लेकिन कई मोबाइल वेटनरी यूनिट वाहन पर चिकित्सक की तैनाती नहीं रहने के कारण बीमार पशुओं के इलाज की सुविधा रफ्तार नहीं कर पा रही है.

क्या है मोबाइल वेटनरी यूनिट, कैसे मिलेगी सुविधा

अब पशुपालकों को अपने पशुओं का इलाज करने के लिए पशु चिकित्सालय जाने की आवश्यकता नहीं है. सरकार द्वारा इसके लिए जहां पशु चिकित्सक व दवा से सुसज्जित मोबाइल वेटनरी यूनिट वाहन पशु पालन विभाग को मुहैया कराया गया है. वहीं टोल फ्री नंबर 1962 भी जारी कर दिया गया है. बताया गया कि मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन में चिकित्सक के साथ-साथ अन्य कर्मी की तैनाती की गयी है. यह वाहन जीपीएस सुविधा युक्त सुसज्जित वाहन है. इसमें पशु रोगों की पहचान, पशु चिकित्सा व लघु सर्जरी, ऑडियो विजुअल प्रचार के लिए आवश्यक उपकरण के साथ कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा रहेगी. पशुपालक टोल फ्री नंबर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कॉल करे या फिर “किसान पशुपालक ऐप” के जरिये सेवा का लाभ ले सकते हैं. आपके एक कॉल पर ही यह वाहन डाक्टर, कर्मी व दवा लेकर आपके दरवाजे पर पहुंचेगी और आपके पशुओं को मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा प्रदान करेंगी.

जिले के नौ प्रखंडों को मिला मोबाइल वेटनरी यूनिट वाहन

जिले में 9 प्रखंड है. जहां पर पहले से प्रखंड पशु अस्पताल कार्यरत है, जबकि भ्रमणशील चिकित्सक घूम-घूम कर गांव में पशुओं इलाज कर रहे हैं. पशुपालकों को अस्पताल तक बीमार पशुओं को लेकर आना पड़ता है, लेकिन अब सभी 9 प्रखंडों को मोबाइल वेटनरी यूनिट वाहन उपलब्ध करा दिया गया है. जो घूम-घूम कर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों के बीमार मवेशी का इलाज कर रहा है.

चिकित्सक की कमी प्रभावित कर रही सेवा

9 प्रखंडों के लिए 9 मोबाइल वेटनरी यूनिट वाहन तो इस सेवा को देख रही एजेंसी ने भेज दिया है, लेकिन कई वाहनों पर चिकित्सकों की कमी है. एक वाहन पर 1 चिकित्सक, 1 पारा वेटनरी और 1 चालक सह परिचारी की तैनाती एजेंसी को करनी है, जबकि उस पर सभी प्रकार की दवा भी एजेंसी को ही उपलब्ध कराना है. जो 9 वाहन भेजा गया है उसमें पांच वाहन पर पशु चिकित्सक की तैनाती नहीं की गयी. इसकी कमी को दूर करने के लिए कॉल सेंटर के माध्यम से अनुभवी डॉक्टर टेली-मेडिसिन सेवा प्रदान कर रहे है. हालांकि, हाल ही में मुख्यालय से निर्देश आया है कि मुंगेर सदर और धरहरा प्रखंड में जो वाहन दिया गया है उस पर वहां के भ्रमणशील चिकित्सा पदाधिकारी की तैनाती की जाये. जो वाहन से घूम-घूम कर इलाज करेंगे. अब सवाल उठाता है कि भ्रमणशील चिकित्सक प्रखंड पशु अस्पताल में रहते हैं तो मोबाइल वेटनरी यूनिट बंद रहेगा, अगर मोबाइल वेटनरी यूनिट में सेवा देते है तो प्रखंड पशु अस्पताल बंद हो जायेगा. इस सभी प्रकार के कठिनाइयों के बीच यह सेवा मुंगेर में बाहल कर दी गयी है.

कहते है जिला पशुपालन पदाधिकारी

जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ कमल देव यादव ने बताया कि मोबाइल वेटनरी यूनिट सेवा के तहत 9 एंबुलेंस वाहन जिले के 9 प्रखंडों के लिए उपलब्ध कराया गया है. जो सुदूरवर्ती गांव में घूम-घूम कर पशुपालकों के बीमार पशुओं को चिकित्सकीय सुविधा प्रदान कर रही है. हालांकि, कुछ एंबुलेंस पर चिकित्सक की तैनाती नहीं है. इसलिए एंबुलेंस पर तैनात कर्मी टेली मेडिसिन सेवा के तहत बीमार पशुओं को चिकित्सकीय सुविधा प्रदान कर रहे है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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