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Home बिहार मुंगेर बिना चले ही कबाड़ बन गयीं महंगी मशीनें व वाहन, करोड़ों का नुकसान

बिना चले ही कबाड़ बन गयीं महंगी मशीनें व वाहन, करोड़ों का नुकसान

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बिना चले ही कबाड़ बन गयीं महंगी मशीनें व वाहन, करोड़ों का नुकसान

उदासीनता : एयर वैक्यूम मशीन, स्वीपिंग मशीन, ऑटोमैटिक कॉम्पैक्टर मशीन कस्तूरबा वाटर वर्क्स में फांक रही धूल

मुंगेर. शहरवासियों से टैक्स के नाम पर मोटा राजस्व वसूला जा रहा है, लेकिन निगम प्रशासन उसका अपव्यय करने से परहेज नहीं कर रहा है. शहर की सफाई के लिए जिस एयर वैक्यूम मशीन, स्वीपिंग मशीन, ऑटोमैटिक कॉम्पैक्टर मशीन सहित अन्य वाहन व मशीनों की खरीदारी करोड़ों रुपये में की गयी थी. आज वह बिना चले ही कबाड़ बन रही है, लेकिन जिम्मेदार इसके प्रति चुप्पी साधे हुए हैं.

60 लाख की मशीन से 60 किलोमीटर भी नहीं हुई सड़क की सफाई

नगर निगम में पूर्व के वर्षों पर वाहन और सफाई संयंत्र की खरीद के नाम पर जनता के टैक्स से वसूल की गयी करोड़ों रुपये खर्च किया, जिसकी उपयोगिता भी आज तक साबित नहीं हो पाई है. वर्ष 2019 में निगम प्रशासन ने 60 लाख की लागत से रोड स्वीप मशीन की खरीदारी की गयी, लेकिन इन छह वर्षों में 60 किलोमीटर शहर की सड़कों की भी सफाई नहीं हो पायी है. हालात यह है कि इसे सड़क पर निकालने से पहले इस पर निगम प्रशासन को लाखों रुपये खर्च करना पड़ेगा.

जिम्मेदारों की लापरवाह के कारण कबाड़ हो गये करोड़ों के वाहन

नगर निगम मुंगेर ने ट्रकनुमा ऑटोमेटिक गारबेज रिफ्यूज कॉम्पैक्टर मशीन की खरीदारी की थी. जिस पर 30 लाख से अधिक राशि खर्च की गयी थी. इसी तरह निगम ने वर्षों पहले 32 लाख खर्च कर ऑटोमेटिक कॉम्पैक्टर मशीन की खरीदारी की थी, जिससे शहर में जगह-जगह लगे डस्टबिन से कचरा उठाव होना था, लेकिन इस मशीन का उपयोग निगम का सफाई विभाग नहीं कर पाया. निगम ने नाली के गंदगी को खींचने वाला एयर वैक्यूम मशीन की खरीदारी में लाखों रुपये खर्च किये, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं कर पाया, जो आज बिना चले ही कस्तूरबा वाटर वर्क्स में रखे-रखे कबाड़ बन चुकी है.

कमीशन के खेल में हुई महंगी मशीनों की खरीदारी !

निगम ने भले ही शहरी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर इन मशीनों की खरीदारी तो की, लेकिन इसका उपयोग निगम प्रशासन नहीं कर सका, जो आज कबाड़ बन चुका है अथवा कबाड़ बनने की ओर अग्रसर है. जानकार बताते हैं कि इन मशीनों के लिए न तो मुंगेर शहर में सड़क है और न ही इसका सही से इस्तेमाल करने के लिए कोई ट्रेंड कामगार है. बावजूद कमीशन के खेल में इन महंगी मशीनों की खरीदारी की गयी. कई मशीनें तो पूरी तरह से कबाड़ बन चुकी है, जबकि कुछ ऐसे वाहन हैं जिसका ऑक्शन करने पर उसे खरीदने वाला नहीं मिलेगा, क्योंकि ये आउटडेटेड हो गये हैं, जिसका ऑक्शन अब कबाड़ के रूप में ही किया जा सकता है.

कई वर्ष पूर्व सफाई संयंत्रों की खरीद की गयी थी, जिसका उपयोग नहीं हो पा रहा है. इसका अध्ययन करायेंगे कि अब यह चलने लायक है या नहीं.

पार्थ गुप्ता, नगर आयुक्तB

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