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Home बिहार मुंगेर मॉडल अस्पताल में शिफ्ट होने के बाद कंगारू मदर केयर यूनिट बंद, नहीं मिल रहा लाभ

मॉडल अस्पताल में शिफ्ट होने के बाद कंगारू मदर केयर यूनिट बंद, नहीं मिल रहा लाभ

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मॉडल अस्पताल में शिफ्ट होने के बाद कंगारू मदर केयर यूनिट बंद, नहीं मिल रहा लाभ

– समय से पूर्व जन्में बच्चों के देखभाल को लेकर मां को नहीं मिल पा रही जानकारी, जानकारी के अभाव में जान गंवा रहे नवजात

मुंगेर

जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में समय से पूर्व जन्मे बच्चों के विशेष देखभाल तथा इससे संबंधित जानकारी मां को देने के लिए कंगारू मदर केयर यूनिट का आरंभ सरकार द्वारा किया गया था, ताकि शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके. लेकिन सदर अस्पताल में इसे लेकर बनाया गया कंगारू मदर केयर यूनिट मॉडल अस्पताल में अन्य वार्डों को शिफ्ट किये जाने के बाद बंद हो गया है. जिससे समय से पूर्व जन्मे बच्चे या नवजातों को स्तनपान के सही तरीकों की जानकारी मांओं को नहीं मिल पा रही है.

लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया था कंगारू मदर केयर

साल 2018 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सदर अस्पताल के पुराने प्रसव केंद्र के समीप लाखों रुपये खर्च कर कंगारू मदर केयर यूनिट खोला गया था. इसमें मॉडल अस्पताल आरंभ होने तक पांच बेड भी लगे थे. जहां प्रसव के बाद वैसी माताओं और नवजातों को भर्ती किया जाना था, जिनके नवजात बच्चे कम वजन या अन्य बीमारी से पीड़ित हैं या समय से पूर्व जन्मे हैं. इसमें ऐसे नवजातों के मां को सही देखभाल की जानकारी दी जानी थी. इसमें बच्चे को स्तनपान कराने के बाद थोड़ी देर सहलाने, उनके कम वजन के कारण होने वाले हाइपोथर्मिया की जानकारी देना तथा इससे बचाव के बारे में बताना है. वहीं कंगारू मदर केयर वार्ड में माताओं और नवजातों को रखने के लिए एसी, हीटर, अत्याधुनिक बेड सहित रैंप तक की सुविधा दी गयी थी.

मॉडल अस्पताल आरंभ होने के बाद बंद

साल 2025 में लगभग 32 करोड़ की लगात से मॉडल अस्पताल मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा अब सभी वार्डों को मॉडल अस्पताल में ही शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन इस बीच सदर अस्पताल एक तो कंगारू मदर केयर यूनिट को ही शिफ्ट करना भूल गया. वही अब अस्पताल में कंगारू मदर केयर पूरी तरह गायब हो चुका है. हलांकि कहने को तो अबतक पुराने प्रसव केंद्र के पास बने भवन में कंगारू मदर केयर यूनिट का बोर्ड लगा है, लेकिन अब वहां दिव्यांग बोर्ड संचालित किया जा रहा है.

शिशु मृत्यु दर को कम नहीं कर पा रहा स्वास्थ्य विभाग

शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार भले की कई योजना चला रही हो या इसके लिये पानी के तरह पैसे बहा रही हो, लेकिन इसके बावजूद मुंगेर स्वास्थ्य विभाग जिले में शिशु मृत्यु दर को कम करने में पूरी तरह विफल हो रहा है. इसे केवल इसी से समझा जा सकता है कि जनवरी से दिसंबर 2025 तक सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में 78 नवजातों की मौत हो चुकी है. यह आंकड़ा केवल सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती होने वाले नवजातों की है. जबकि प्रत्येक माह जन्म से 1 साल की आयु के बीच कई बच्चे अपनी जान गंवा रहे हैं.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ राजू ने बताया कि मॉडल अस्पताल में कंगारू मदर केयर यूनिट के लिये जगह को तैयार किया जा रहा है. सभी व्यवस्था कर मॉडल अस्पताल में जल्द कंगारू मदर केयर यूनिट को आरंभ किया जायेगा.

कब-कब आया जानकारी के अभाव में नवजात की मौत का मामला

5 जनवरी 2024 –

टेटियाबंबर प्रखंड के राजाडीह गांव में टीका पड़ने से 24 घंटे के अंदर दो नवजातों की मौत हो गई थी. हलांकि इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की जांच के अनुसार नवजातों को दूध पिलाने के बाद उनकी माताओं द्वारा उनकी पीठ को सहलाया नहीं गया और गलत तरीके से बच्चे को सुला दिया गया. जिससे सांस में परेशानी होने से दोनों नवजातों की मौत हो गयी थी.

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6 सितंबर 2024 –

टेटियाबंबर प्रखंड के भूना पंचायत में एक नवजात की टीका लगाने के बाद मौत रात को अचानक हो गयी थी. जिसकी जांच में भी स्वास्थ्य विभाग ने पाया था कि रात को नवजात को दूध पिलाने के उसे ठीक से देखभाल नहीं किया गया था.——————–

6 जनवरी 2025

– संग्रामपुर प्रखंड के अमइया में एक साथ दो बच्चों की मौत बीसीजी का टीका लगाने के बाद हो गयी थी. इस मामले में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जांच किया गया था और इसमें भी दूध पिलाने के बाद बच्चे की सही देखभाल नहीं किये जाने का मामला सामने आया था.

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