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सीता के वियोग की कथा सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर

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सीता के वियोग की कथा सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर

असरगंज. अयोध्या की कथावाचिका मंजूलता ने प्रभु श्रीराम के अपनी धर्मपत्नी सीता के वियोग की कथा सुनाई. वे रविवार को असरगंज के राजबाड़ी दुर्गा स्थान में आयोजित नौ दिवसीय राम कथा के नौवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही. कथावाचिका ने कहा कि वनवास के दौरान जब रावण सीता माता का हरण कर उन्हें लंका ले जाता है तो भगवान राम और लक्ष्मण सीता माता को ढूंढते हुए दंडकारण्य वन में पहुंचते हैं और वहां से शबरी माता के आश्रम में पहुंच जाते हैं. लेकिन शबरी घर से भागकर दंडकारण्य वन में पहुंचती है और वहां मातंग ऋषि की सेवा करने लगती है. भील जाति की होने के कारण शबरी आश्रम में छिपकर सेवा करती थी. एक दिन शबरी की सेवा भावना देखकर मुनिवर अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपने आश्रम में शबरी को शरण दे दी. उन्होंने मातंग ऋषि से ही धर्म और शास्त्र का ज्ञान प्राप्त किया. मातंग ऋषि ने ही शबरी को श्रीराम की भक्ति करने को कहा. इसीलिए एक दिन जब ऋषि मातंग को लगा कि उनका अंत समय निकट है तो उन्होंने शबरी से कहा कि वे अपने आश्रम में ही प्रभु श्री राम की प्रतीक्षा करें. वे एक दिन अवश्य ही उनसे मिलने आएंगे और उसके बाद ही तुम्हें मोक्ष प्राप्त होगा. शबरी प्रतिदिन अपनी कुटिया के रास्ते में आने वाले पत्थरों और कांटों को हटाने लगी. ताकि श्रीराम के आगमन के लिए मार्ग सुलभ हो जाए. रोज ताजे फल और बैर तोड़कर श्रीराम के लिए रखती. तब एक दिन प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में शबरी की कुटिया पहुंचे. जहां शबरी प्रभु श्रीराम को देखकर भाव विभोर हो गई और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे. मौके पर यजमान राजेश दास, रंजन बिंद, विजय शंकर उपाध्याय, अधिक लाल साह सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे.

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