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Munger news : बाढ़ ने किया बेघर, अब बारिश कर रही बेदम

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Munger news : बाढ़ ने किया बेघर, अब बारिश कर रही बेदम

Munger news : गंगा के जल स्तर में लगातार गिरावट जारी है, फिर भी बाढ़ पीड़ितों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. मंगलवार से शुरू हुई बारिश ने बाढ़ पीड़ितों के जीवन को संकट में डाल दिया है. घर-गांव में बाढ़ का पानी घुसने के बाद लोग अपने परिवार व माल-मवेशियों के साथ सड़क व रेलवे लाइन के किनारे प्लास्टिक शीट का टेंट डालकर शरण लिये हुए थे. यहां वे किसी तरह दिन काट रहे थे, लेकिन बदकिस्मती यहां भी इनका पीछा नहीं छोड़ रही है. बारिश के कारण उन्हें अपने साथ मवेशियों को भी टेंट में रखने पर मजबूर होना पड़ रहा है. टेंट के बाहर किसी तरह लोग खाना बना लेते थे, लेकिन बारिश से वह भी मुश्किल हो गया है. भूख से दिन भर बच्चे बिलखते रहते हैं. लोगों का कहना है कि सरकारी स्तर पर भोजन की व्यवस्था की जाती, तो उन्हें बहुत हद तक कुछ राहत मिल सकती थी.

एक ही तंबू में अपने मवेशियों संग काट रहे दिन

पिछले एक सप्ताह से बाढ़ का पानी घरों में घुस आने से लोग गांव-घर छोड़ कर सूखे और ऊंचे स्थान पर शरण लिये हुए हैं. महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों के साथ ही मवेशियों संग निकले बाढ़ पीड़ित जहां जगह मिली, वहीं पर शरण ले लिये हैं. कल तक किसी तरह उनकी जिंदगी कट रही थी, लेकिन बुधवार से परेशानी बढ़ गयी है. अब उन्हें प्रकृति की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. किला परिसर में समाहरणालय व सूचना भवन के पास कई हिस्सों में लोग अपने परिवार और मवेशियों के साथ किसी तरह दिन काट रहे रहे थे, लेकिन अब बारिश से भी उनको संघर्ष करना पड़ रहा है.

बारिश ने जीवन किया दुरूह

जाफरनगर पंचायत से पहुंचीं लाखों देवी व पवित्री देवी ने कहा कि एक तो बाढ़ के कारण पूरे गांव के लोग जिंदगी जीने की जद्दोजहद कर रहे हैं. ऊपर से इस बारिश ने जीवन दुरूह कर दिया है. बारिश नहीं हो रही थी, तो हमलोग खुले में भी समय गुजार ले रहे थे, लेकिन बुधवार की रात से लगातार हो रही बारिश के कारण पॉलीथिन के तंबू में एक साथ पूरा परिवार बैठ कर रात गुजार रहा है. बकरियों को भी बारिश से बचाने के लिए अपने साथ ही तंबू में रखना पड़ रहा है. न जाने भगवान किस जन्म का बदला हमलोगों से ले रहे हैं. अगर बारिश नहीं रुकी, तो जीना और मुश्किल हो जायेगा. यही हाल बरियारपुर, रतनपुर सहित अन्य क्षेत्रों में रेलवे पटरी के किनारे और एनएच-80, एनएच-333 किनारे तंबू गाड़ कर रह रहे बाढ़ पीड़ितों की भी है.

बाढ़ व बारिश से लाखों लोग परेशान

मुंगेर जिले की छह प्रखंडों की 36 से अधिक पंचायतें बाढ़ प्रभावित हैं. इससे तीन लाख से अधिक की आबादी बुरी तरह से प्रभावित है. इनके गांव-घर पहले से ही बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं, जबकि उनकी आजीविका का सबसे बड़ा साधन खेती-बारी पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है. दियारा से लेकर करारी तक और चौर क्षेत्र की हजारों एकड़ में लगी मकई, सब्जी व धान की फसल बाढ़ के पानी में डूबने से बर्बाद हो चुकी है. इनके समक्ष पहले से ही रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो चुकी थी. अब रही-सही कसर बारिश ने पूरी कर दी है. बाढ़ के कारण घर छोड़ कर इधर-उधर शरण लिये लोगों का अब बारिश ने उनका जीना दूभर कर दिया है. प्रकृति की दोहरी मार झेल रहे बाढ़ पीड़ितों का आलम यह है कि प्रशासनिक राहत भी कम पड़ रही है.

पशुओं के लिए चारे का इंतजाम करना मुश्किल

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बड़ी आबादी परिवार व मवेशियों के साथ गांव-घर छोड़ कर निकल चुकी है. दियारा क्षेत्र की अधिकांश आबादी का आधार पशुपालन है. एक-एक परिवार के पास दर्जन भर मवेशी हैं, जिन्हें लेकर वे लोग इधर-उधर शरण ले रखे हैं. गाय-भैंस, बकरी को लेकर लोग चराने निकल जाते थे, लेकिन बारिश होने के कारण सभी मवेशी खूंटे में बंधे हुए हैं. अब पशुओं चारे के लाले पड़े हैं.

डेंजर लेवल से 43 सेंटीमीटर नीचे बह रही गंगा

मुंगेर में गंगा के जल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. पिछले तीन दिनों में 39.95 मीटर से घट कर गंगा का जल स्तर गुरुवार की शाम 4 बजे 98.90 मीटर पर पहुंच गया, जो अब डेंजर लेवल से 43 सेंटीमीटर नीचे है. केंद्रीय जल आयोग की मानें, तो तेजी से जल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है. अगले दो-तीन दिनों में वार्निंग लेवल तक पहुंच जायेगी. मुंगेर में गंगा के जल स्तर का वार्निंग लेवल 38.33 एवं डेंजर लेवल 39.33 है.

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