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Home बिहार मुंगेर प्रसिद्ध शायर बशीर बद्र को साहित्य प्रहरी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

प्रसिद्ध शायर बशीर बद्र को साहित्य प्रहरी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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प्रसिद्ध शायर बशीर बद्र को साहित्य प्रहरी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मुंगेर. साहित्यिक संस्था साहित्य प्रहरी के तत्वावधान में रविवार को शिवगंज दरियापुर स्थित संस्था के सचिव एवं गीतकार शिवनंदन सलिल के आवास पर प्रसिद्ध शायर मरहूम बशीर बद्र की स्मृति में एक शोकसभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार यदुनंदन झा ‘द्विज’ ने की. सभा में उपस्थित साहित्यकारों, कवियों और बुद्धिजीवियों ने बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को याद किया. कवि कुमार विजय गुप्त ने कहा कि बशीर बद्र हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं के पाठकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे. उनकी शायरी आम आदमी के जीवन और अनुभवों की सशक्त अभिव्यक्ति थी. ज्योति कुमार सिन्हा ने उन्हें जिंदगी का शायर बताते हुए कहा कि डिमेंशिया से पीड़ित होने के कारण वे पिछले लगभग 11 वर्षों से मंचों से दूर रहे, लेकिन उनकी उत्कृष्ट शायरी उन्हें हमेशा जीवित रखेगी. शिवनंदन सलिल ने कहा कि बशीर बद्र ने शायरी को केवल हुस्न और इश्क की दुनिया तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे इंसान के दुख-दर्द, संघर्ष और समाज के वास्तविक चेहरों को सामने लाने का माध्यम बनाया. अब्दुल्ला बुखारी ने कहा कि उनकी शायरी जमीन से जुड़ी हुई थी और सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचती थी. वहीं अलख निरंजन कुशवाहा ने उन्हें इंसानियत की आवाज और समाज को सचेत करने वाला शायर बताया. यदुनंदन झा ‘द्विज’ ने कहा कि आज समाज को बशीर बद्र जैसे यथार्थवादी शायरों की जरूरत है, जो कल्पनाओं के बजाय जीवन की सच्चाइयों को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त करें. उन्होंने उन्हें भोगे हुए यथार्थ का शायर बताया. एहतेशाम आलम ने कहा कि बशीर बद्र ने अपने शेरों के माध्यम से समाज को आइना दिखाने का कार्य किया. मोके पर प्रो जयप्रकाश नारायण, प्रकाश सिन्हा, कुमकुम सिन्हा, राजीव कुमार सिंह एवं घनश्याम पोद्दार सहित कई साहित्यप्रेमियों ने भी अपने विचार व्यक्त किये. सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत शायर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.

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