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Home बिहार मुंगेर रमजान के आखिरी जुमे पर विभिन्न मस्जिदों में अकीदतमंदों ने अदा की नमाज

रमजान के आखिरी जुमे पर विभिन्न मस्जिदों में अकीदतमंदों ने अदा की नमाज

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रमजान के आखिरी जुमे पर विभिन्न मस्जिदों में अकीदतमंदों ने अदा की नमाज

देश में अमन-चैन व खुशहाली की दुआ मांगी मुंगेर. माहे रमजान के आखिरी जुमा अलविदा पर शुक्रवार को शहर की विभिन्न मस्जिदों में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने नमाज अदा की. साथ ही देश में अमन-चैन व खुशहाली की दुआ मांगी. शहर के जामा मस्जिद, गुलजार पोखर, दिलावरपुर, नयागांव, चुरंबा, सुजावलपुर, हजरतगंज बाड़ा व किला क्षेत्र में स्थित मस्जिदों में अलविदा की नमाज अकीदत और श्रद्धा के साथ अदा की गयी. नमाज से पहले जामा मस्जिद के इमाम रागीब रहमानी ने रमजान की अहमियत पर कहा कि रमजान का महीना बेहद पाक और बरकतों से भरा होता है. यह महीना मगफिरत और जहन्नुम से निजात का महीना है. इसी पवित्र माह में अल्लाह तआला ने कुरान शरीफ को दुनिया में उतारा. उन्होंने बताया कि हदीस के मुताबिक, रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है. पहला रहमत का, दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नुम से आजादी का होता है. वर्तमान में रमजान का आखिरी अशरा चल रहा है. जो जहन्नुम से निजात दिलाने वाला है. उन्होंने कहा कि इस अशरे में एक ऐसी मुबारक रात भी आती है, जो हजार महीनों की इबादत से बेहतर मानी जाती है. यह रात 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रोजे की रातों में से किसी एक में होती है. इमाम ने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि इन मुबारक रातों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें और अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगें. उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि तीन लोगों की दुआ कभी खाली नहीं जाती. रोजेदार की इफ्तार के वक्त की दुआ, मजलूम की दुआ और आदिल बादशाह की दुआ. उन्होंने कहा कि रमजान में जहां रोजा और नमाज फर्ज है. वहीं सदका, फितरा और जकात अदा करना भी जरूरी है. हर मुसलमान को ईद की नमाज से पहले अपना फितरा और जकात अदा कर देना चाहिए. अंजुमन इस्माल हिमायत की ओर से एलान किया गया कि इस वर्ष फितरा की रकम प्रति व्यक्ति 70 रुपये तय की गयी है. साथ ही बताया गया कि ईदगाह में ईद की नमाज सुबह 7:30 बजे अदा की जायेगी.

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