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Home बिहार मुंगेर नये अधिवक्ताओं के उम्र सीमा के बंधन पर सरकार से पुनर्विचार किये जाने की उठी मांग

नये अधिवक्ताओं के उम्र सीमा के बंधन पर सरकार से पुनर्विचार किये जाने की उठी मांग

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नये अधिवक्ताओं के उम्र सीमा के बंधन पर सरकार से पुनर्विचार किये जाने की उठी मांग

तारापुर. नवप्रवेशी अधिवक्ताओं को मिलने वाली स्टाइपेंड योजना में उम्र सीमा के बंधन पर सरकार से पुनर्विचार की मांग उठी है. विधिज्ञ संघ मुंगेर की अधिवक्ता प्रीति कुमारी मिश्रा ने शुक्रवार को तारापुर विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की. अधिवक्ता प्रीति मिश्रा ने बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में विधि की पढ़ाई पूरी कर वकालत में आने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए तीन साल तक प्रतिमाह 5 हजार रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की थी. लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा उम्र सीमा का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था, जबकि हाल ही में जिला बार एसोसिएशन, मुंगेर की ओर से स्टाइपेंड योजना के लिए मांगे गए आवेदनों में आयु 22 से 32 वर्ष निर्धारित की गयी थी. प्रीति मिश्रा ने कहा कि विधि की पढ़ाई के लिए सामान्यतः कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं है. कई ऐसे नए अधिवक्ता हैं जिन्होंने हाल में ही एलएलबी पूरी की है. लेकिन उम्र 32 साल से अधिक होने के कारण वे खुद को योजना से बाहर मान रहे हैं. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जब विधि शिक्षा के लिए उम्र बाध्य नहीं है, तो सहायता योजना में भी आयु सीमा के प्रावधान की समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने विधिज्ञ संघ के माध्यम से मुख्यमंत्री को आग्रह पत्र भेजने का सुझाव दिया. वहीं विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कहा कि मामले से जुड़ी सभी जानकारियां एकत्रित कर तथ्यों का अध्ययन किया जाएगा. संघ हमेशा अधिवक्ताओं के हितों के प्रति संवेदनशील रहा है. संघ के माध्यम से मुख्यमंत्री का ध्यान इस विषय पर आकृष्ट कराया जायेगा.

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