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Home बिहार मुंगेर वृद्धों के बीपी व सुगर जांच तक ही सिमटा मुंगेर सदर अस्पताल का नशा मुक्ति केंद्र

वृद्धों के बीपी व सुगर जांच तक ही सिमटा मुंगेर सदर अस्पताल का नशा मुक्ति केंद्र

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वृद्धों के बीपी व सुगर जांच तक ही सिमटा मुंगेर सदर अस्पताल का नशा मुक्ति केंद्र

– नशा मुक्ति केंद्र से 6 बेड हटाकर वहां चल रहा गैर संचारी रोग विभाग, तीन माह में आये हैं 37 मरीज

– मुंगेर में युवाओं के बीच बढ़ रहे नशे की लत के बीच इलाज की व्यवस्था बदहालमुंगेरएक ओर जहां शराबबंदी के बावजूद लगातार शराब पीने वाले को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने का मामला सामने आ रहा है. वहीं मुंगेर में युवाओं के बीच इन दिनों तेजी से स्मैक व ड्रग्स के नशे की लत बढ़ती जा रही है. ऐसे में मुंगेर सदर अस्पताल में संचालित नशा मुक्ति केंद्र इन दिनों केवल वृद्धों के बीपी व सुगर जांचने तक ही सिमित रह गया है, क्योंकि नशा मुक्ति केंद्र में पूर्व में लगे 6 बेड को हटाकर अब वहां गैर संचारी रोग विभाग संचालित किया जा रहा है. यह हाल तब है, जब केवल तीन माह में 37 मरीज अपने नशे की लत को छुड़ाने यहां आ चुके हैं.

वृद्धों के बीपी व सुगर जांच में ही सिमटा नशा मुक्ति केंद्र

सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र में यहां नशे की लत छुड़ाने आने वाले मरीजों के लिये 6 बेड की व्यवस्था थी. जबकि यहां उनके लिये टीवी सहित अन्य सुविधायें भी थी, ताकि नशे की लत से दूर रहने के दौरान नशे के आदि मरीज खुद को अलग रख सकें, लेकिन बाद में अस्पताल प्रबंधन द्वारा यहां लगे सभी बेडों को हटा दिया गया. जबकि नशा मुक्ति केंद्र में ही गैर संचारी रोग विभाग का संचालन कर दिया गया. अब यहां अधिकांश केवल वृद्ध मरीजों के बीपी व सुगर सहित कैंसर व अन्य मरीजों का ही इलाज किया जा रहा है.

तीन माह में नशा मुक्ति केंद्र में आये 37 मरीज

एक ओर जहां शराब, सिगरेट, गुटखा या अन्य नशे के लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. वहीं हाल के दिनों में मुंगेर में स्मैक व ड्रग्स के नशे के मामले भी सामने आने लगे हैं. जिसमें सबसे अधिक युवा वर्ग शामिल है. वहीं स्मैक व ड्रग्स काफी महंगे होने के कारण युवा अब इसके लत के कारण अपराध के दलदल में भी फंस रहे हैं. सदर अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र के अनुसार बीते तीन माह में यहां विभिन्न नशे की लत के आदी 37 मरीज इलाज के लिये आ चुके हैं. जिसमें अप्रैल माह में एक, मई माह में 26 तथा जून माह में 10 नशे के आदी मरीज अपनी लत छुड़ाने आये हैं.

वार्डों में ही नशे के लत के मरीजों को किया जा रहा भर्ती

नशा मुक्ति केंद्र में गैर संचारी रोग विभाग संचालित होने के बाद यहां लगे 6 बेड को हटा दिया गया है. जिसके बाद से अब यदि नशे के आदी किसी मरीज को भर्ती करने की जरूरत होती है तो उसे पहले इमरजेंसी वार्ड भेजा जाता है, जहां से उसे सामान्य वार्डों में ही सामान्य मरीजों के साथ भर्ती किया जाता है. इतना ही नहीं वार्ड में भर्ती होने के बाद नशे के आदी मरीजों को अपने काउंसलिंग और दवाओं के लिये वार्ड से वापस नशा मुक्ति केंद्र ही आना पड़ता है. जबकि जिले में नशे के आदी मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी नशा मुक्ति केंद्र में केवल एक चिकित्सक डॉ के रंजन, कंसलटेंट नितिन आनंद तथा एक एएनएम के भरोसे ही है.

कहते हैं चिकित्सा पदाधिकारी

नशा मुक्ति केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ के रंजन ने बताया कि भवनों की कमी के कारण परेशानी हो रही है. नया मॉडल अस्पताल बनने के बाद वहां सभी प्रकार की व्यवस्था होगी. हलांकि वर्तमान में नशे के आदी मरीजों के लिये कांउसलिंग तथा दवा की पर्याप्त व्यवस्था है. जबकि मरीजों का समय-समय पर फॉलोअप भी लिया जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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