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Home बिहार मुंगेर सावन मास का धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक महत्व भी

सावन मास का धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक महत्व भी

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सावन मास का धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक महत्व भी

जमालपुर. सरस्वती शिशु मंदिर सफियाबाद परिसर में सावन माह के दूसरी सोमवारी पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें दर्जनों बच्चों ने हिस्सा लिया. कार्यकारी प्रधानाचार्य शशिकांत सिंह, कार्यक्रम प्रमुख कृर्ति कमल और आचार्य पंकज कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. आचार्य प्रदीप कुमार शर्मा ने बच्चों को सावन माह के महत्व के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि सावन भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र महीना है. समुद्र मंथन की पौराणिक कथा का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए विषपान किया और विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया. इसी कारण सावन मास में शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व है. इसे रुद्राभिषेक कहा जाता है. रुद्राभिषेक से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को जीवन के कष्ट से मुक्ति मिलती है. शशिकांत सिंह ने अपनी संस्कृति के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि सावन मास का धार्मिक ही नहीं, अपितु सांस्कृतिक महत्व भी है. इस महीने में देश के विभिन्न भागों में विशेष कर उत्तर भारत में तीज और रक्षाबंधन जैसे पर्व बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं. कांवर यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक झांकी मात्रा नहीं, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण धार्मिक चेतना और संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है. इस दौरान कक्षा उदय से तृतीय तक के छात्र-छात्राओं ने भगवा वस्त्र धारण कर कांवर लेकर एक मनमोहक झांकी निकाली. जो विद्यालय परिसर से आरंभ होकर नौलखा दुर्गा स्थान प्रांगण स्थित शिव मंदिर तक गई. जहां बच्चों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया. मौके पर आचार्य मुकेश, अमित, पंकज, सीमा, पूनम, ममता, सावित्री, प्रियसी, प्रिया आदि मौजूद थी.

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