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जलवायु परिवर्तन बन चुका है एक वैश्विक संकट

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जलवायु परिवर्तन बन चुका है एक वैश्विक संकट

– विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वानिकी कॉलेज में कार्यशाला का आयोजित

मुंगेर

वानिकी कॉलेज मुंगेर में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर “प्रकृति से प्रेरणा: जलवायु और हमारे भविष्य के लिए “विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, उसकी अध्यक्षता संस्थान के अधिष्ठाता डॉ अनिल पासवान ने की. जबकि मुख्य अतिथि के रूप में कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक इंजीनियर अशोक कुमार ने भाग लिया.

कार्यक्रम का संयोजन एनएसएस प्रभारी डॉ. प्रवीण कुमार एंव डॉ. उमाकांत सिंह के मार्गदर्शन में किया गया. इस मौके पर अतिथि गृह, महिला छात्रावास एवं पुरुष छात्रावास के परिसर में पौधरोपण किया गया.

इस अभियान के तहत मुख्य रूप से छायादार और सजावटी पौधे लगाए गए, जिनमें अशोक, महोगनी और जामुन के पौधे प्रमुख थे. इस अवसर पर यह संदेश दिया गया कि वृक्ष न केवल हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि बढ़ते तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) को नियंत्रित करने में भी सबसे कारगर हथियार है. सेमीनार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि इंजीनियर अशोक कुमार ने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक संकट बन चुका है. उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रकृति से सीख लेकर ही हम एक स्थायी और सुरक्षित भविष्य की नींव रख सकते हैं. उन्होंने जलवायु संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कार्बन फुटप्रिंट को कम करना और प्रकृति की सहनशीलता से सीखकर टिकाऊ व इको-फ्रेंडली जीवनशैली अपनाना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व को बचाने के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है.

हमारा भविष्य पूरी तरह से प्रकृति के स्वास्थ्य पर है निर्भर : डॉ अनिल

अधिष्ठाता डॉ. अनिल पासवान ने कहा कि हमारा भविष्य पूरी तरह से प्रकृति के स्वास्थ्य पर निर्भर है. विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है. उन्होंने छात्रों से अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने की अपील की. उन्होंने बीएफसीआरआई को एक ””ग्रीन कैंपस”” और जीरो-वेस्ट जोन बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो युवाओं को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाए. छात्र वक्ता अंकिता कुमारी, इलियास अंजुम, अभिषेक कुमार और अक्षांश कुमार ने मंच से विश्व पर्यावरण दिवस की महत्ता, प्लास्टिक प्रदूषण के नुकसान और युवाओं की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला. इसी कड़ी में संकाय के शिक्षक अजीत कुमार मंडल और डॉ. उमाकांत सिंह ने भी अपने बहुमूल्य विचार साझा किए. कार्यशाला में डॉ. कामेश मनगन्वी, किष्टो कुमार, कृतिका सुमन, इंजीनियर शुचि कुमारी, प्रियंका, धनंजय कुमार, अर्पणा पांडेय मुख्य रूप से मौजूद थे.

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