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बरियारपुर प्रखंड कार्यालय को तीन दशक बाद भी अपना भवन नसीब नहीं

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बरियारपुर प्रखंड कार्यालय को तीन दशक बाद भी अपना भवन नसीब नहीं

बरियारपुर

पिछले तीन दशक से बरियारपुर का प्रखंड कार्यालय संचालित हो रहा है, लेकिन आजतक प्रखंड कार्यालय को अपना भवन नसीब नहीं हुआ है. वर्ष 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा बरियारपुर को प्रखंड का दर्जा देते हुए प्रखंड कार्यालय का उद्घाटन किया गया था. बीते हुए 32 वर्षों में कई बार सरकार का गठन का हुआ, लेकिन किसी सरकार ने प्रखंड कार्यालय को अपना भवन उपलब्ध नहीं कराया. जबकि बरियारपुर के रहने वाले शैलेश कुमार जदयू में ग्रामीण कार्य मंत्री भी रहे, बावजूद उसने प्रखंड को अपना भवन उपलब्ध कराने में दिलचस्पी नहीं लिये.

चुनाव खत्म, नेता का भी रिश्ता नाता हो जाता है खत्म

जब विधानसभा अथवा लोकसभा का चुनाव आता है तब प्रखंड कार्यालय के लिए किसी जगह भूमि को चिन्हित करते हुए घोषणा की जाती है कि जल्द ही उस स्थान पर प्रखंड कार्यालय का अपना भवन बनेगा. लेकिन चुनाव पूर्ण हो जाने पर न तो नेता को कोई मतलब नहीं रहता है और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों को. भवन निर्माण की बातें फाइलों में दब जाती है. पहली बार प्रखंड कार्यालय भवन निर्माण के लिए वर्तमान समय में चल रहे प्रखंड कार्यालय भवन के बगल में ही स्थल को चिन्हित किया गया. किसानों से बातचीत भी की गई. लेकिन मुआवजे की राशि देने की बात पर सहमति नहीं बन पाई. क्योंकि सरकार उस स्थल को खेती की बताती है. जबकि वर्तमान में वह स्थल आवासीय बन चुका है. उसके बाद रतनपुर पंचायत तो बहादुरपुर गांव में प्रखंड कार्यालय भवन बनने की चर्चा तेज हुई. लेकिन वहां भी कृषि भूमि और आवासीय भूमि की बात पर किसानों के साथ सहमति नहीं बन पाई. जबकि बहादुरपुर और प्रखंड कार्यालय के पीछे बनने वाले भवन के लिए किसानों को नोटिस भी दी गई थी. प्रखंड के लोगों के बीच अब इस बात की चर्चा खुलेआम होने लगी है कि जब सरकार बिहार में विकास की बात कह रही है तो जमीन का उचित मुआवजा देकर जमीन का अधिग्रहण किया जाय.

कहते हैं अंचल अधिकारी

अंचल अधिकारी रवि कुमार ने बताया कि प्रखंड कार्यालय भवन निर्माण के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है. भूमि चयनित होने के बाद प्रखंड कार्यालय भवन बनने की प्रक्रिया में तेजी आयेगी.

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