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Home बिहार मुंगेर जर्जर भवन में चल रहा दिव्यांग बोर्ड व फूड डिपार्टमेंट का कार्यालय

जर्जर भवन में चल रहा दिव्यांग बोर्ड व फूड डिपार्टमेंट का कार्यालय

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जर्जर भवन में चल रहा दिव्यांग बोर्ड व फूड डिपार्टमेंट का कार्यालय

प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न एजेंसियां मजे से कर रहा निजी उपयोग

मुंगेर

मुंगेर मुख्यालय में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का हाल अजब-गजब है. जहां सीधे तौर पर मरीजों से जुड़े कई विभाग जर्जर भवनों में बिना सुविधा के चल रहे हैं. वहीं मॉडल अस्पताल बनने के बाद सदर अस्पताल के पुराने भवनों और प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न एजेंसियां मजे से अपना कार्यालय चला रही है. सिविल सर्जन कार्यालय के सामने जर्जर भवन में दिव्यांग बोर्ड कार्यालय संचालित हो रहा है. वही पुराने पोस्टमार्टम हाउस में फूड डिर्पाटमेंट का संचालन किया जा रहा है. जबकि अस्पताल के पुराने पुरूष वार्ड में अब बेड सीट व कपड़े की सफाई करने वाली एजेंसी अपना काम कर रहा. जबकि महिला वार्ड में एंबुलेंस मेंटनेंस एजेंसी के कर्मी अपना कार्यालय संचालित कर रहे. हद तो यह है कि मरीजों के लिये बने प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल में सफाई एजेंसी, भव्या जैसी एजेंसी अपना कार्यालय चला रहे.

जर्जर भवन में चल रहा दिव्यांग बोर्ड कार्यालय

वैसे तो प्रभात खबर द्वारा दिव्यांग बोर्ड के दौरान दिव्यांगों के बैठने के लिये जगह तक नहीं होने का मामला उठाये जाने के बाद सिविल सर्जन के निर्देश पर पुराने कंगारू मदर केयर में दिव्यांग बोर्ड शिफ्ट कराया गया. जहां प्रत्येक गुरूवार को दिव्यांग बोर्ड का आयोजन किया जाता है, लेकिन इन दिव्यांगों के दस्तावेजों को रखने और उन्हें यूडीआईडी कार्ड उपलब्ध कराने वाला दिव्यांग कार्यालय अबतक सिविल सर्जन कार्यालय के सामाने जर्जर भवन में चल रहा है. जहां न तो दिव्यांगों के बैठने की कोई व्यवस्था है और न ही इनके लिये पीने के पानी तक की व्यवस्था है. ऐसे में दिव्यांग कार्यालय में जो दिव्यांग आते हैं. उन्हें खड़े होकर ही अपना कार्य कराना पड़ता है. जबकि पानी के लिये बोतल बंद पानी ही सहारा है.

पोस्टमार्टम हाउस में चल रहा फूड डिर्पाटमेंट

जिला फूड डिर्पाटमेंट कार्यालय लगभग तीन साल से प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल के बगल में बने पुराने पोस्टमार्टम हाउस में चल रहा है. जहां यह कार्यालय मात्र दो कमरों में संचालित हो रहा है. हद तो यह है कि यहां न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम है और न ही लोगों के आने-जाने का कोई सुलभ और सुरक्षित रास्ता. जबकि बीते दिनों यहां लगे मोटर का वायर चोरी कर लिया गया. जिसके कारण अब यहां पानी तक उपलब्ध नहीं है. ऐसे में जो लोग फूड लाइसेंस लेने आते हैं. उनमें से अधिकांश को तो पहले कार्यालय ढूंढ़ने के लिये काफी चक्कर लगाना पड़ता है.

खाली भवनों पर एजेंसियों का कब्जा

मॉडल अस्पताल बन जाने के बाद अब सदर अस्पताल के अधिकांश पुराने वार्ड पूरी तरह खाली हो चुके हैं. लेकिन अब इसे स्वास्थ्य विभाग के व्यवस्थाओं की अजब-गजब स्थिति ही कहें कि इन पुराने भवनों में मरीजों से सीधे तौर पर जुड़े कार्यालयों को शिफ्ट करने की जगह इन भवनों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न एजेंसियों को अपना कार्य करने के लिये दे दिया गया है. जिससे आम लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ राजू ने बताया कि दिव्यांग कार्यालय और फूड डिर्पाटमेंट को जल्द ही अस्पताल में ही उपलब्ध किसी भवन में शिफ्ट कर दिया जायेगा. हलांकि एजेंसियों को भी अपने लिये जगह की आवश्यकता होती है. जिसे लेकर ही आवश्यकता अनुसार इन एजेंसियों को जगह उपलब्ध कराया गया है.

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बॉक्स

प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल बना मीटिंग हॉल

मुंगेर : सरकार ने लगभग 32 करोड़ की लागत से वर्ष 2023 में मुंगेर सदर अस्पताल को 100 बेड का प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल मरीजों के लिये दिया था. लेकिन अब यह प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल मीटिंग हॉल बनकर रह गया है. जहां आशा व एएनएम की बैठक, प्रशिक्षण संचालित किया जाता है. जबकि किसी कमरे में सफाई एजेंसी तो किसी कमरे में वासिंग एजेंसी का कब्जा है. हलांकि हीट वेब, डेंगू या किसी अन्य महामारी की तैयारी को लेकर यहां व्यवस्था तो मरीजों के लिये की जाती है, लेकिन मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता.

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