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बदहाली : गरीब को आया हार्ट अटैक, तो संकट में फंसी जान

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बदहाली : गरीब को आया हार्ट अटैक, तो संकट में फंसी जान

सदर अस्पताल में बिना वेंटिलेटर के आइसीयू वार्ड, कॉर्डियक मॉनिटर के सहारे मरीज

अस्पताल में नहीं हैं हार्ट के विशेषज्ञ चिकित्सक, छह माह में 143 मरीजों में 71 रेफर, 26 की मौत

मुंगेर

मुंगेर जिले में स्वास्थ्य सेवा भले ही पिछले कुछ सालों में अत्याधुनिक हुई हो, इसके बावजूद कई गंभीर बीमारियों के लिए अब भी मुंगेर के मरीजों को बाहर जाकर ही इलाज कराना पड़ता है. अब मुंगेर जैसा जिला, जहां के नौ प्रखंडों का अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण है. वहां यदि गरीब को हार्ट अटैक आ जाये, तो समझिए जान संकट में फंस गयी, क्योंकि मुंगेर सदर अस्पताल में न तो कॉर्डियक (हार्ट) के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही यहां के आइसीयू वार्ड में गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर की ही व्यवस्था है. स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले छह माह में जिला मुख्यालय के सदर अस्पताल में हार्ट की बीमारी वाले कुल 143 मरीज इलाज के लिए आये. इसमें से 71 मरीजों को रेफर कर दिया गया, जबकि 26 की मौत हो चुकी है.

100 बेड के मॉडल अस्पताल में हैं दो आईसीयू वार्ड

सदर अस्पताल में पहले छह बेड का आइसीयू वार्ड संचालित होता था, जहां अति गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता था. वहीं अब इसे 100 बेड के मॉडल अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है. जहां दो तरह के आइसीयू वार्ड संचालित हैं. एक पांच बेड का आईसीयू वार्ड है, जहां गंभीर बीमारियों के सामान्य मरीजों को भर्ती किया जाता है. जबकि दूसरा आईसीयू वार्ड आठ बेड वाला है. इसमें अति गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भर्ती किया जाता है, लेकिन अस्पताल का आइसीयू वार्ड सालों से बिना वेंटिलेटर के ही संचालित हो रहा है, जबकि किसी भी आइसीयू वार्ड के लिए वेंटिलेटर सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है, जो अति गंभीर मरीजों के लिए आवश्यक लाइफ सपोर्ट होता है, लेकिन सदर अस्पताल के आइसीयू वार्ड में गंभीर मरीजों का इलाज कॉर्डियक मॉनिटर के भरोसे ही होता है.

अस्पताल में नहीं हैं हार्ट के विशेषज्ञ चिकित्सक

सदर अस्पताल में सेवाओं की बदहाली का हाल यह है कि यहां सालों से एक भी हार्ट के स्पेशलिस्ट डाक्टर नहीं हैं. इसके कारण यहां हार्ट के मरीजों का इलाज सामान्य चिकित्सकों के भरोसे ही होता है. हद तो यह है कि इसमें नियमित चिकित्सक की ड्यूटी तक नहीं है, क्योंकि तीनों शिफ्ट में आइसीयू वार्ड का संचालन इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक के भरोसे ही होता है. कई बार एक साथ आइसीयू व इमरजेंसी में गंभीर मामला आने के बाद मरीजों को चिकित्सक के आने का इंतजार करना पड़ता है. इसमें कई बार मरीज की मौत हो जाने पर खुद अस्पताल के चिकित्सकों को मरीज के परिजनों का कोपभाजन बनना पड़ता है.

छह माह में हार्ट के 26 मरीजों की मौत

सदर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले हार्ट के मरीजों को किस प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है. इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय के सदर अस्पताल में जनवरी से जून तक 6 माह में हार्ट के 143 मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं. इसमें से 71 मरीजों को सदर अस्पताल से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है. वहीं इसमें से 26 मरीजों की मौत इलाज के दौरान सदर अस्पताल में हो चुकी है. छह माह में सदर अस्पताल में हार्ट के मरीजों का आंकड़ा देखें तो प्रतिमाह औसतन 2 मरीज सदर अस्पताल में अपनी जान गंवा रहे हैं. अब ऐसे में जो सामर्थ्यवान हैं, वे तो अपने मरीज को निजी अस्पताल या बाहर इलाज कराने लेकर चले जाते हैं, लेकिन सबसे बड़ी मुसीबत गरीब मरीजों के लिए होती है. इनके लिए हायर सेंटर या निजी अस्पताल जाना मुश्किल भरा होता है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डाॅ रामप्रवेश प्रसाद ने बताया कि आइसीयू वार्ड को मॉडल अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां जल्द ही वेंटिलेटर लगाया जायेगा. इसके लिए कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. इसके लिए व्यवस्था की जा रही है.

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बॉक्स

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छह माह में सदर अस्पताल आये हार्ट के मरीजों की आंकड़ा

माह भर्ती मरीज रेफर मौत

जनवरी 24 11 6

फरवरी 19 9 6

मार्च 26 13 4

अप्रैल 29 16 4

मई 26 12 1

जून 19 10 5

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