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Motihari: जहां राम का वास होता है वहां काम प्रवेश नहीं होता है : भक्तिप्रभा

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Motihari: जहां राम का वास होता है वहां काम प्रवेश नहीं होता है : भक्तिप्रभा

Motihari: मोतिहारी. नरसिंह बाबा मंदिर प्रांगण में मानव सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ में बुधवार को उत्तर प्रदेश उरई पचोखरा की साध्वी भक्तिप्रभा ने शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग पर अपना उद्बोधन करते हुए कहा कि मानस में वर्ण है कि विवाह के लिए महादेव को तैयार करने के लिए उन्हें अखंड समाधि से वापस लाना आवश्यक था. इसके लिए देवताओं ने कामदेव को शिव के पास भेजा. कामदेव ने उनके समाधि में विक्षोभ उत्पन्न किया तो भगवान शिव ने अपने त्रिनेत्र खोलकर कामदेव को ही भस्म कर दिया. इसके गुढ़ रहस्य का निरूपण करते हुए साध्वी ने कहा कि शिव के मन, बुद्धि, चित में केवल राम रहते है और जहां राम का वास होता है वहां काम का प्रवेश नहीं हो सकता. काम से आशय कामना से है. उन्होंने व्याख्या करते हुए बताया कि इस जगत का प्रत्येक जीव कामनाओं के वश में है. कामनाओं को पूर्णत. विसर्जित नहीं किया जा सकता है. इसका केवल दिशा परिवर्तित करने की जरूरत होती है. जीवन को अपने सभी कामनाओं को वासना के स्थान पर उपासना से जोड़ देना चाहिए. इस इतने मात्र से जीव का कल्याण होने लगता है. कथावाचिका ने शिव बरात की अत्यंत मनोहारी आलंकारिक वर्णन किया, जिससे रामकथा में आये भक्तगण झूम उठे. मंच का संचालन पां. रामनिरंजन पांडेय ने की. मौके पर प्रो. सुरेश चंद्र प्रसाद, कामेश्वर सिंह, अवधकिशोर त्रिवेदी उपस्थित थे.

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