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Home बिहार मोतिहारी Motihari: जिंदा हैं रामेश्वर प्रसाद, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हो चुके हैं मृत, बंद हुई पेंशन

Motihari: जिंदा हैं रामेश्वर प्रसाद, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हो चुके हैं मृत, बंद हुई पेंशन

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Motihari: जिंदा हैं रामेश्वर प्रसाद, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हो चुके हैं मृत, बंद हुई पेंशन
जीवित होने के बावजूद पेंशन बहाली की मांग को लेकर दस्तावेज दिखाते रामेश्वर प्रसाद

छौड़ादानो से राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

Motihari News: सरकार बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन और आर्थिक सुरक्षा देने के लिए पेंशन योजनाएं चला रही है, लेकिन कई बार सरकारी रिकॉर्ड की एक गलती किसी वृद्ध के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है. पूर्वी चंपारण के छौड़ादानो प्रखंड से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां 76 वर्षीय रामेश्वर प्रसाद जीवित हैं, लेकिन सरकारी पोर्टल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. नतीजा यह हुआ कि उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद हो गई और अब उन्हें खुद को जीवित साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

मामला छौड़ादानो प्रखंड की नरकटिया पंचायत का है. खास बात यह है कि रामेश्वर प्रसाद पंचायत के वर्तमान उपमुखिया ब्रजेश कुमार के पिता हैं. इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है.

खाते में नहीं आई पेंशन तो खुली गड़बड़ी की पोल

रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि नियमित रूप से मिलने वाली पेंशन की राशि इस बार उनके खाते में नहीं पहुंची. शुरुआत में उन्हें लगा कि तकनीकी कारणों से भुगतान में देरी हुई होगी, लेकिन जब उन्होंने जानकारी जुटाई तो चौंकाने वाली बात सामने आई. जांच में पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड और पोर्टल में उन्हें मृत दर्शाया गया है. इसी आधार पर उनकी पेंशन का भुगतान रोक दिया गया.

हाल ही में कराया था केवाईसी

रामेश्वर प्रसाद का कहना है कि उन्होंने हाल ही में ऑनलाइन केवाईसी भी कराया था. इसके प्रमाण उनके पास मौजूद हैं. इसके बावजूद सत्यापन प्रक्रिया के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

उन्होंने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें सबसे अधिक आवश्यकता सरकारी सहायता की है, लेकिन अब उन्हें अपनी पहचान और अस्तित्व साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. रामेश्वर प्रसाद कहते हैं, “मैं जिंदा हूं, लेकिन सरकारी कागजों में मुझे मृत बता दिया गया है. अब मुझे यह साबित करना पड़ रहा है कि मैं जीवित हूं.”

सवालों के घेरे में सत्यापन प्रक्रिया

इस घटना ने सत्यापन प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पंचायत के उपमुखिया के पिता के साथ ऐसी गलती हो सकती है तो आम लोगों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. ग्रामीणों के अनुसार कई वृद्धजन पेंशन योजना से जुड़े रिकॉर्ड में त्रुटियों के कारण परेशान हैं. उन्हें समय पर लाभ मिलने के बजाय अपनी पात्रता साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं.

बुजुर्गों के लिए पेंशन ही सहारा

ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश वृद्धजन अपनी दवाइयों, रोजमर्रा के खर्च और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए पेंशन राशि पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में पेंशन बंद हो जाने से उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है. रामेश्वर प्रसाद के परिजनों का कहना है कि एक प्रशासनिक गलती ने पूरे परिवार को परेशान कर दिया है. अब वे पेंशन बहाल कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं.

प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से जांच कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया में हुई लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और दोषी कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए.

साथ ही उन्होंने प्रभावित बुजुर्ग की पेंशन अविलंब बहाल करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की है. इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका.

लोगों के बीच चर्चा का विषय बना मामला

मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. लोगों का कहना है कि योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंदों को राहत देना है, लेकिन रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियां कई बार उन्हें और अधिक परेशान कर देती हैं.

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और रामेश्वर प्रसाद की पेंशन कब तक बहाल हो पाती है.

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