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Home बिहार मधुबनी जिला मुख्यालय सहित तीन प्रखंडों में किया गया नाइट ब्लड सर्वे

जिला मुख्यालय सहित तीन प्रखंडों में किया गया नाइट ब्लड सर्वे

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जिला मुख्यालय सहित तीन प्रखंडों में किया गया नाइट ब्लड सर्वे

मधुबनी. फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जिले में जिला मुख्यालय सहित तीन प्रखंडों में नाइट ब्लड सर्वे अभियान चलाया गया. इसमें जिला मुख्यालय सहित बेनीपट्टी, बिस्फी एवं पंडौल प्रखंड शामिल है. सभी क्षेत्रों में दो-दो सत्र स्थल का चयन किया गया था. चयनित स्थलों पर रात में 2400 लोगों के रक्त का नमूना लिया गया. इसमें में 5 फाइलेरिया पॉजिटिव चिन्हित किया गया. इसके बाद जिला संबंधित प्रखंडों में 10 अगस्त से सर्वजन दवा का वितरण किया जाएगा. इस संबंध में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डीएस सिंह ने कहा कि जिले में फाइलेरिया के प्रसार दर का सही तरीके से अनुमान लगाने के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थायी एवं रैंडम साइट के तहत नाइट ब्लड सर्वे अभियान चलाया गया. इसमें 2400 से अधिक लोगों का ब्लड सैंपल लिया गया जिसमें शहरी क्षेत्र में 5 मरीज पॉजिटिव मिले. डीएमओ ने कहा कि रात के 8 बजे से ब्लड सैंपलिंग का कार्य शुरू किया गया जो रात के 12 बजे तक चला. इसमें 20 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष एवं महिलाओं का सैंपल लिया गया. इसका उद्देश्य फाइलेरिया के मरीज मिलने के बाद उसका तत्काल इलाज मुहैया कराकर जिले को रोग से मुक्ति दिलाना है. 10 अगस्त से जिले में खिलाई जाएगी दवा फाइलेरिया उन्मूलन सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के तहत 10 अगस्त से दवा खिलाई जाएगी. इसमें डीईसी व अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी. 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं, प्रसव उपरांत 7 दिनों तक व गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को दवा नहीं खिलायी जाएगी. कार्यक्रम में छूटे हुए घरों में कर्मियों द्वारा पुनः भ्रमण कर दवा खिलाई जाएगी. दवा का सेवन खाली पेट में नहीं करना है. दवा स्वास्थ्य कर्मियों के सामने खाना जरूरी है. अल्बेंडाजोल की गोली चबाकर खायी जाती है. क्यूलेक्स मच्छर काटने से होता है फाइलेरिया डॉ सिंह ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को फाइलेरिया ना हो इसके लिए 5 साल तक लगातार साल में एक बार दवा का सेवन अनिवार्य रूप से करना चाहिए. इस बीमारी से मरीज की मृत्यु नहीं होती. लेकिन उसका जीवन बोझ हो जाता है. इसका वाहक क्यूलेक्स मच्छर है. यह मच्छर आज किसी व्यक्ति को संक्रमित करता है तो बीमारी के लक्षण आने में 5 से 10 या 15 साल तक का समय लग सकता है. इसके बाद जब बीमारी का पता चलता है तब तक काफी देर हो जाती है. इससे बचने के लिए दवा का सेवन जरूर करना चाहिए.

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