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Home बिहार मधुबनी मधुबनी: मलमास के समापन पर पिपराघाट त्रिवेणी संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

मधुबनी: मलमास के समापन पर पिपराघाट त्रिवेणी संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

मधुबनी: मलमास के समापन पर पिपराघाट त्रिवेणी संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
संगम में स्नान करते श्रद्धालु

मधुबनी के बाबूबरही से अविनाश कुमार कर्ण की रिपोर्ट

Madhubani News: जिले में मलमास के समापन के पावन अवसर पर मंगलवार की अहले सुबह से ही आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिला.बाबूबरही प्रखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक पिपराघाट स्थित कमला, बलान एवं सोनी नदी के पवित्र त्रिवेणी संगम तट पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा.लाखों की संख्या में पहुंचे दूर-दराज के श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में आस्था की पवित्र डुबकी लगाई.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मलमास के समापन के दिन इस पावन त्रिवेणी संगम में स्नान करना अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी माना जाता है.इसी गहरी आस्था के चलते विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु सोमवार की रात से ही पिपराघाट पहुंचने लगे थे.

हर-हर गंगे के जयकारों से गूंजा तट 

भोर की पहली किरण फूटते ही पूरा संगम तट ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय पुरुषोत्तम देव’ के गगनभेदी जयकारों से पूरी तरह गूंज उठा.पुण्य लाभ और आत्मिक शांति के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने भी कड़ाके की परवाह किए बिना त्रिवेणी में डुबकी लगाई.स्थानीय पंडितों ने बताया कि मलमास को साक्षात ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा जाता है.धार्मिक दृष्टिकोण से इस पूरे महीने में किए गए दान-पुण्य, भजन और पवित्र नदियों में स्नान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है.मलमास के अंतिम दिन त्रिवेणी में डुबकी लगाने से मनुष्यों के सारे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

साल भर बना रहता है भक्तिमय माहौल 

तीन नदियों के मिलन स्थल होने के कारण पिपराघाट त्रिवेणी संगम सालों भर श्रद्धालुओं के बड़े आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहता है.कार्तिक पूर्णिमा, कार्तिक कल्पवास, माघी स्नान और मलमास समापन सहित विभिन्न बड़े पर्व-त्योहारों पर यहां लाखों की तादाद में लोग पहुंचते हैं.कार्तिक महीने में तो यहां महीने भर कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.साधु-संतों और आम भक्तों की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन, हनुमान मंदिर स्वयंसेवी संगठन और चिकित्सा शिविर की टीमें मुस्तैद रहती हैं.

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