मामले की सुनवाई के दौरान प्रधानाध्यापक परिषद के सामने नामांकन पंजी लेकर उपस्थित हुई. लेकिन किशोर न्यायालय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी को नामांकन पंजी में छेड़छाड़ का संदेह हुआ . इसके बाद प्रधान दंडाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से नामांकन पंजी की जांच करने का निर्देश दिया था.
विधिवत संधारित नही था नामांकन पंजी
नामांकन पंजी के जांच के दौरान नामांकन पंजी विधिवत संधारित नहीं पाया गया. एपीओ के अनुसार जांच के दौरान सामने आया कि वर्ष 2020 से अद्यतन तक तक प्रधानाध्यापक का हस्ताक्षर एक ही दिन में किया गया है. नामांकन पत्र किसी सत्र में बंद नहीं पाया गया. नामांकन पंजी में फोटो नहीं है. एक भी टीसी निर्गत नहीं है. प्रथम प्रवेश में अभिभावक का हस्ताक्षर नहीं है. लिपिक का न तो हस्ताक्षर पाया गया और न ही आधार संख्या व मोबाइल नंबर था. डीइओ ने की अनुशासनिक कारवाई का निर्देश एपीओ ने कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापिका पूनम कुमारी पर डीईओ ने कर्तव्य में लापरवाही बरतने, प्रभार हस्तांतरण में स्वच्छेचारिता बरतने एवं अनुशासनहीनता के कारण अनुशासनिक कारवाई करने का निर्देश दिया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
