मधुबनी से सुशील कुमार की रिपोर्ट
Madhubani Crime News: मधुबनी के शत्रुपट्टी गांव में इन दिनों सिर्फ एक ही आवाज सुनाई दे रही है—”मेरा बाबू वापस ला दो…”. 24 वर्षीय मो. सरफुद्दीन की हत्या और 12 दिन बाद उसका सड़ा-गला शव मिलने की खबर ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है. जिस घर में कुछ दिन पहले बेटे के लौटने की खुशी थी, वहां अब हर तरफ मातम पसरा है.
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खुशी का घर देखते-देखते गम में बदल गया
सरफुद्दीन 15 जून को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से अपने गांव लौटा था. सुबह करीब 10 बजे घर पहुंचने के बाद परिवार के साथ समय बिताया. दोपहर करीब साढ़े तीन बजे वह अपने दोस्त सदरे आलम के साथ बाइक से निकला.
परिजनों को लगा कि वह कुछ ही देर में वापस लौट आएगा, लेकिन यह उसकी आखिरी विदाई साबित हुई.
12 दिन तक कोई सुराग नहीं, फिर मिली दिल दहला देने वाली खबर
करीब 12 दिनों तक परिवार अपने बेटे की तलाश करता रहा. शनिवार को घर से लगभग सात किलोमीटर दूर घोघरडीहा-हटनी सड़क स्थित भुतही बलान नदी के पूर्वी बधार में एक गड्ढे से सड़ा-गला शव बरामद हुआ.
सूचना मिलते ही परिवार मौके पर पहुंचा. परिजनों का कहना है कि तब तक पुलिस शव को बोरे में बंद कर चुकी थी, इसलिए मौके पर पहचान संभव नहीं हो सकी.
बाद में दरभंगा में पोस्टमार्टम के दौरान शव पर मौजूद कपड़ों से परिजनों ने उसकी पहचान मो. सरफुद्दीन के रूप में की.
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“बाबू नाना से मिले बिना ही चला गया…”
सरफुद्दीन की वृद्ध नानी बार-बार बेसुध हो जा रही हैं. होश में आते ही उनकी आंखों से आंसू रुक नहीं रहे.
वह सिर्फ इतना कह पा रही हैं, “बाबू नाना से मिले बिना ही निकल गया… फिर कभी लौटकर नहीं आया.”
उधर मामी की चीखें पूरे मोहल्ले को रुला रही हैं. वह बार-बार एक ही बात दोहरा रही हैं—”मेरे बाबू को वापस ला दो…”
परिवार का सबसे बड़ा सहारा चला गया
परिजनों के मुताबिक, सरफुद्दीन पांच भाई-बहनों में सबसे जिम्मेदार और कमाने वाला था. उसकी मौत ने पूरे परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति को झकझोर दिया है.
नाना अनिसुर रहमान कहते हैं,
“मेरा नाती ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था, लेकिन चारों भाइयों में सबसे समझदार और कमाने वाला था. उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. अब मेरी बेटी का पूरा परिवार बिखर जाएगा. अल्लाह को ऐसा नहीं करना चाहिए था.” इतना कहते-कहते उनकी आवाज भर्रा जाती है.
गांव वाले भी नहीं समझ पा रहे वजह
ग्रामीण बताते हैं कि सरफुद्दीन बेहद शांत स्वभाव का युवक था. गांव में उसका सिर्फ एक करीबी दोस्त सदरे आलम था. वह किसी विवाद या झगड़े से हमेशा दूर रहता था और अपने काम से ही मतलब रखता था. यही वजह है कि गांव के लोग भी उसकी हत्या की वजह समझ नहीं पा रहे हैं.
अब पुलिस की जांच पर टिकी हैं निगाहें
सरफुद्दीन के ननिहाल और पैतृक घर पर लगातार लोगों की भीड़ जुट रही है. पूरे शत्रुपट्टी गांव में शोक के साथ-साथ दहशत का माहौल है.
हर किसी के मन में एक ही सवाल है—आखिर शांत स्वभाव के इस युवक की इतनी बेरहमी से हत्या किसने और क्यों की?
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. परिवार और ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच पूरी होने के बाद हत्या की वजह और आरोपियों का पता चल सकेगा.
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