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बीएनएमयू : खेल प्रशिक्षकों की कमी, कैसे निखरेंगे खिलाड़ी

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बीएनएमयू : खेल प्रशिक्षकों की कमी, कैसे निखरेंगे खिलाड़ी

मधेपुरा. खिलाड़ियों का खेल तभी निखर सकता है, जब उन्हें बेहतर प्रशिक्षण मिले. प्रशिक्षण के लिए पीटीआइ का होना आवश्यक है. इसके उलट भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय पीटीआइ की कमी से जूझ रहा है. विश्वविद्यालय के अधिकांश महाविद्यालयों में पीटीआइ की कमी है. पीटीआइ नहीं रहने से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है, जबकि खिलाड़ियों का विकास तभी संभव है, जब उन्हें बेहतर प्रशिक्षण मिले. स्थिति यह है कि पीटीआइ नहीं रखने से न तो महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं को खेल की ट्रेनिंग मिल रही और न ही किसी प्रकार का महाविद्यालय स्तर पर आयोजन हो रहा है. पीटीआइ नहीं रहने के कारण बाहर नहीं जा पाती है कई खेल की टीम बीएनएमयू अंतर्गत अधिकांश महाविद्यालयों या फिर यूं कहें कि लगभग सभी महाविद्यालयों में पीटीआइ नहीं रहने से बाहर टीम भेजने में भी दिक्कत हो रही है. कुछ ही महाविद्यालय के पीटीआइ की बदौलत विश्वविद्यालय की टीम कभी-कभार बाहर जा रही है. जानकारी के अनुसार कभी-कभार ऐसा भी हो रहा है कि कई खेल की टीम पीटीआइ नहीं रहने के कारण बाहर नहीं जा पाती है. सबसे अधिक परेशानी महिला वर्ग की टीम भेजे जाने में हो रही है. बीएनएमयू अंतर्गत सिर्फ एक अंगीभूत महाविद्यालय ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा में पीटीआइ बहाल है. जानकारी के अनुसार बीएनएमयू में 14 अंगीभूत व 17 से अधिक संबद्ध महाविद्यालय है. इनमें अधिकांश जगह पीटीआइ का पद कई वर्षों रिक्त है. कई महाविद्यालय के पीटीआइ रिटायर्ड भी हो गये हैं, जबकि कुछ महाविद्यालय तो ऐसे भी हैं, जहां कभी पीटीआइ की नियुक्ति ही नहीं हुई है. वहीं कई महाविद्यालयों में संविदा पर पीटीआइ है. भुगतान के बाद भी छात्र को नहीं मिल पाता है लाभ बीएनएमयू अंतर्गत सभी महाविद्यालयों में खेल मद में छात्र-छात्राओं से शुल्क लिया जाता है. वहीं जब टीम भेजने की बारी आती है, तो कई अंगीभूत व संबद्ध महाविद्यालय पल्ला झाड़ लेते है. छात्र-छात्राओं को इसका लाभ नहीं मिलता है. आउटडोर के अलावा इंडोर खेल का लाभ भी छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय नहीं दे पाती है, जबकि जानकारी के अनुसार प्रति छात्र महाविद्यालय स्पोर्ट्स शुल्क में 60 रुपये वसूलते हैं. इसमें 30 रुपये विश्वविद्यालय में महाविद्यालय जमा करता है, लेकिन स्पोर्ट्स शुल्क का सही उपयोग छात्र-छात्राओं पर नहीं हो पा रहा है.

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