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प्लेटफार्म ऊंचाई काफी कम, घायल होते हैं यात्री

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प्लेटफार्म ऊंचाई काफी कम, घायल होते हैं यात्री

मुरलीगंज.

कुसाहा त्रासदी बाद से सहरसा कटिहार रेलखंड पर 2013 से बड़ी लाइन पर ट्रेन परिचालन तो शुरू हो गया, लेकिन मुरलीगंज रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म वही रह गया जिसपर छोटी लाइन से ट्रेन का परिचालन होता था. इस प्लेटफॉर्म की ऊंचाई इतनी कम है कि ट्रेन पर चढ़ने व उतरने के दौरान यात्री बराबर घायल होते रहते हैं. कई बार रेलवे प्रशासन से इस प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाने की मांग की गयी लेकिन आज तक इसपर कोई काम नहीं हो पाया है. दरअसल, ट्रेन के बोगी निकास द्वार से प्लेटफार्म काफी नीचा होने के कारण अक्सर ऐसे हादसे होते हैं. ऐसे में रेलवे ने इस समस्या से निपटने की मुरलीगंज रेल संघर्ष समिति के तत्वावधान में कई बार धरना व अनशन का कार्यक्रम किया गया पर रेलवे प्रशासन प्लेटफार्मों की ऊंचाई के ट्रेन निकास द्वार के समानांतर करने की दिशा में अब तक कोई पहल नहीं किया गया.

– एक दशक से अधिक होने के बाद भी बड़ी रेल लाइन के प्लेटफार्म में नहीं किया गया परिवर्तित

रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक एवं दो की ऊंचाई कम होने के कारण यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है. स्टेशन के प्लेटफार्म की ऊंचाई कम होने के कारण ट्रेन से उतरते समय सबसे अधिक परेशानी महिलाओं एवं बच्चों को होती है. प्लेटफार्म की ऊंचाई कम होने के कारण कई बार यात्री ट्रेन में चढ़ते और उतरते समय गिर भी चुके हैं. इसके अलावा प्लेटफार्म क्रमांक एक और दो पर 50 वर्ष पुराना शेड जिसकी लंबाई एवं चौड़ाई आज तक बढ़ाई नहीं गयी. कोसी के बाढ़ के बाद लगभग चार वर्षों तक सहरसा पूर्णिया रेल खंड पर बंद रहा. पुनः जब 2013 में बड़ी रेल लाइन पर रेल यातायात प्रारंभ हुआ, लेकिन रेलवे स्टेशन की प्लेटफार्म छोटी लाइन के प्लेटफार्म को आज तक बड़ी रेल लाइन के प्लेटफार्म में परिवर्तित नहीं किया गया.

– छोटे शेड में यात्रियों को ठहरने के लिए नहीं मिल पाती है जगह –

अब तक दर्जनों घटनाएं ट्रेन पर चढ़ने उतरने के दौरान हो चुकी है. जिसमें कई यात्रियों के पैर कट गये और कई की तो मौत भी हो गयी है.

यात्रियों को पुराने छोटे से शेड में यात्री को जगह नहीं मिल पाती है. यात्रियों को खुले में आसमान के नीचे ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है. यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी बारिश एवं गर्मी के मौसम में होती है. प्लेटफार्म पर शेड बनाने के लिए रेलवे द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है. मुरलीगंज वार्ड नंबर 3 के 25 वर्षीय लड़के के दोनों पैर कट चुके थे, लेकिन इलाज के दौरान भी उसे नहीं बचाया जा सका. पिछले वर्ष भी इसी ऐसी ही घटना हुई थी. लगातार कई बार इस तरह की घटना हो चुकी है.

कहते है जनप्रतिनिधि

जदयू नेता रूपेश कुमार गुलटेन ने कहा कि प्लेटफॉर्म नीचे रहने के कारण जब ट्रेन पर बुजुर्ग लोगों को चढ़ाना होता है तो परेशानी समझ में आती है. चिकित्सा के हब कहे जाने वाले पूर्णिया जाने के दौरान जब मुरलीगंज स्टेशन से यात्री गाड़ी या सवारी गाड़ी या एक्सप्रेस गाड़ी से यात्रा करने आते हैं तो कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

रेल संघर्ष समिति मुरलीगंज के संयोजक बाबा दिनेश मिश्रा कई बार रेलवे प्लेटफार्म को ट्रेन के प्रवेश द्वार के सामानांतर करने के लिए आंदोलन भी किया. कई चरणों में आंदोलन हुआ, रेल प्रशासन समस्तीपुर को ज्ञापन भी दिया गया लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है.

हेल्पलाइन सचिव विकास आनंद ने कहा स्थानीय सांसद दिनेश चंद्र यादव से मिलकर मुरलीगंज रेलवे स्टेशन की मांग को उठाया था, लेकिन मुरलीगंज और मधेपुरा के लिए मांगों को अनदेखा कर यहां सौतेला पान का व्यवहार किया जा रहा है.

वहीं उन्होंने कहा कि जब भी रेल परिचालन की बात करते हैं तो सिर्फ सहरसा-बख्तियारपुर पिछले महीने सहरसा से बढ़ाकर उसे पूर्णिया से परिचालन की घोषणा की गयी थी पर फिर पुनः ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. इस मामले को पूर्णिया सांसद संतोष कुशवाहा ने भी उठाया था जबकि स्थानीय सांसद इस दिशा में पहल करते नहीं दिखे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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