मधेपुरा के पंचायत में एक भी ST परिवार नहीं, फिर रिपोर्ट में कैसे दर्ज हो गए 12 मतदाता? ग्रामीणों ने उठाए बड़े सवाल

Panchayat Election: चौसा की घोषई पंचायत में ST मतदाताओं की संख्या को लेकर विवाद. ग्रामीणों ने चुनाव आयोग की सूची पर सवाल उठाए, बीडीओ ने जांच शुरू होने की बात कही.

By Pratyush Prashant | July 5, 2026 10:54 AM

मधेपुरा से रिपोर्ट

Panchayat Election: पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच चौसा प्रखंड की घोषई पंचायत में आरक्षण सूची को लेकर नया विवाद सामने आ गया है. ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत में एक भी अनुसूचित जनजाति (ST) परिवार नहीं रहता, लेकिन चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड आरक्षण सूची में 12 अनुसूचित जनजाति मतदाताओं का उल्लेख किया गया है. इस दावे के बाद स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है.

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण का निर्धारण जातिवार जनसंख्या के आधार पर होता है. ऐसे में यदि रिकॉर्ड में गलत आंकड़े दर्ज किए गए हैं, तो इसका सीधा असर पंचायत की आरक्षण व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया पर पड़ सकता है. फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है.

पटना: बीएसएससी अभ्यर्थियों ने लंबित परीक्षाओं की तिथि जारी करने की मांग को लेकर आयोग कार्यालय में प्रदर्शन किया. 10-15 दिन में तारीख नहीं आने पर महाआंदोलन की चेतावनी दी.

ग्रामीणों का दावा, पंचायत में नहीं है एक भी ST परिवार

चौसा प्रखंड की घोषई पंचायत में कुल 11 वार्ड हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी वार्ड में अनुसूचित जनजाति का एक भी परिवार निवास नहीं करता. इसके बावजूद चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड पंचायत चुनाव आरक्षण सूची में अनुसूचित जनजाति की संख्या दर्ज होने से लोग हैरान हैं.

ग्रामीणों के अनुसार सूची में वार्ड नंबर 1 में पांच, वार्ड नंबर 2 में तीन और वार्ड नंबर 5 में चार अनुसूचित जनजाति मतदाताओं का उल्लेख किया गया है. यानी कुल 12 ST मतदाताओं की संख्या दिखाई गई है, जिसे ग्रामीण पूरी तरह गलत बता रहे हैं.

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आरक्षण प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते, तो पंचायत चुनाव के आरक्षण निर्धारण पर इसका प्रभाव पड़ सकता है. उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत की वास्तविक जनसंख्या और जातिवार विवरण का दोबारा सत्यापन कराया जाए. यदि रिपोर्ट तैयार करने में किसी स्तर पर त्रुटि या गड़बड़ी हुई है, तो उसे तत्काल सुधारकर सही जानकारी सार्वजनिक की जाए.

Panchayat Election: प्रशासन ने क्या कहा?

इस मुद्दे पर पूछे जाने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सरीना आजाद ने बताया कि मामले की पड़ताल की जा रही है. जांच के बाद तथ्य सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल प्रशासन की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. यदि ग्रामीणों का दावा सही पाया जाता है, तो पंचायत चुनाव से जुड़ी सूची में आवश्यक संशोधन किया जा सकता है.

घोषई पंचायत के इस मामले को लेकर गोपाल दास, अशोक यादव, अजय खुशबू, श्याम सुंदर शर्मा, भीखन यादव, पवन यादव, अवधेश यादव, स्वर्ण किरण, अरविंद यादव, मुरो यादव, बबलू शर्मा, सुबोध साह, संजय महतो, रघुनंदन शर्मा, सदानंद महतो, बबलू यादव, जयकुमार शर्मा, सुमंत शर्मा सहित कई ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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