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कुलपति के एक साल के कार्यकाल में नहीं हुआ है विश्वविद्यालय में कोई प्रगति

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कुलपति के एक साल के कार्यकाल में नहीं हुआ है विश्वविद्यालय में कोई प्रगति

प्रतिनिधि,

मधेपुरा

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने शनिवार को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के यूएमआइएस कार्यालय में ताला लगाकर हंगामा किया. इस दौरान बीएनएमयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. परीक्षा नियंत्रक डॉ शंकर कुमार मिश्रा, पुलिस अधिकारी संतोष कुमार समेत अन्य पुलिस जवानों ने अभाविप नेताओं व कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह मांगों पर अडिग रहे.

स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में नामांकन में मेधा सूची में की गयी है गड़बड़ीअभाविप द्वारा जारी आंदोलन के कारण दूर-दराज से आये छात्र-छात्राओं को परेशानी हुई. छात्र-छात्राओं को बिना काम कराये लौटना पड़ा. शाम 4.30 बजे कार्यालय समय समाप्त होने के बाद अभाविप नेताओं व कार्यकर्ताओं ने आंदोलन को स्थगित कर दिया. उनलोगों ने कहा कि सोमवार को फिर आंदोलन करेंगे. अभाविप के राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद सदस्य अभिषेक यादव ने कहा कि बीते दिनों कुलपति को ज्ञापन के माध्यम से सभी बातें अवगत कराया गया था कि यूएमआइएस के द्वारा किस प्रकार से स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में नामांकन में मेधा सूची में गड़बड़ी की गयी है. उन्होंने कहा कि कई विषयों में खाली सीटों को यूएमआइएस के अधिकारियों के द्वारा 10 हजार रुपये लेकर सीटों को बेचा जा रहा है.

प्रक्रिया समाप्त होने के बावजूद भरने लगी कई खाली सीटअभाविप के प्रदेश सह मंत्री समीक्षा यदुवंशी ने कहा कि यूएमआइएस के पोर्टल पर रिक्त सीटों की सूची प्रत्येक दिन परिवर्तित हो रही है. उन्होंने कहा कि द्वितीय चरण के स्पॉट राउंड के माध्यम से नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होने के बावजूद कई खाली सीटें भरने लगी. इससे स्पष्ट होता है कि यूएमआइएस ने बिचौलियों के माध्यम से मिलीभगत करके जानबूझकर बची हुई सीटों को 10 हजार रुपया में बेचने का धंधा बना रखा है .

छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बुलाकर की जाती है डराने की कोशिशप्रदेश सह मंत्री समीक्षा यदुवंशी ने कुलपति पर आरोप लगाया कि इनके एक साल के कार्यकाल में बीएनएमयू में कोई प्रगति का कार्य नहीं हुआ है, केवल शिक्षा माफिया का सुरक्षित पनाहगार बना है. कुलपति स्वयं सभी शिक्षा माफियाओं के संरक्षक बनकर बैठ गये हैं. जब किसी विषय को लेकर उनके पास जाते हैं, तो वह चीखने-चिल्लाने लगते हैं और खुद को ईमानदार दिखाने की कोशिश करने लगते हैं. सबूत होने के बावजूद तथ्यों को दरकिनार कर देते हैं. अभाविप के विभाग संयोजक सौरभ यादव ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए हमेशा पुलिस बुलाकर डराने व धमकाने का खेल वर्तमान कुलपति के समय में चल रहा है. अभाविप बीते एक वर्ष में कई बार बीएनएमयू प्रशासन को ज्ञापन दे चुकी है, लेकिन कुलपति सभी शिक्षा माफियाओं का संरक्षक बनकर विश्वविद्यालय को उनके हाथों सौंप दिया है. अभाविप के जिला संयोजक नवनीत सम्राट ने कहा कि जब तक यूएमआइएस द्वारा मेधा सूची में छेड़छाड़ कर अवैध नामांकन जैसे कृत्यों की जांच नहीं की जाती है, तब तक अभाविप का चरणबद्ध आंदोलन चलता रहेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि यूएमआइएस के द्वारा जानबूझकर छात्र-छात्राओं के पंजीयन में पिता के स्थान पर माता का नाम, माता के स्थान पर पिता का नाम और जानबूझकर छात्र-छात्राओं के नाम को अशुद्ध किया जाता है, ताकि इसे सुधारने के नाम पर अवैध उगाही की जा सके. यूएमआइएस अवैध उगाही का अड्डा बन चुका है, जिसका संरक्षण स्वयं कुलपति कर रहे हैं. मौके पर प्रदेश कार्यकारणी सदस्य नीतीश सिंह यादव, नगर मंत्री अंकित आनंद, राजू सनातन, बबलू कुमार, रवि रंजन, अंशु कुमार, सत्यम कुमार, सूरज कुमार, प्रिंस कुमार, बमबम कुमार आदि उपस्थिति थे.

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