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मिथिला, मैथिली और रेणु एक दूसरे के पूरक

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मिथिला, मैथिली और रेणु एक दूसरे के पूरक

फणीश्वरनाथ रेणु और मैथिली विषयक परिसंवाद में मैथिली साहित्य और रेणु के साहित्य सृजन पर मंथन, मधेपुरा रविवार को कौशल्याग्राम स्थित मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के बिंदेश्वरी बाबू सभागार में साहित्य अकादमी दिल्ली और मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित फणीश्वरनाथ रेणु और मैथिली विषयक परिसंवाद के आयोजन के बहाने फणीश्वरनाथ रेणु और मैथिली को चाहने वालों के जुटान का केंद्र रहा. फणीश्वरनाथ रेणु और मैथिली विषयक परिसंवाद का उद्घाटन मधेपुरा कॉलेज के संस्थापक सह श्री कृष्ण विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अशोक कुमार, कार्यक्रम संयोजक पुष्यमित्र,प्रख्यात मैथिली साहित्यकार तारानंद वियोगी,प्रधानाचार्या डॉ पूनम यादव,सिंडिकेट सदस्य कैप्टन गौतम कुमार,बीएनएमयू के पूर्व एनएसएस समन्वयक प्रो अभय कुमार,साहित्यकार विनय कुमार चौधरी, उप प्रधानाचार्य डॉ भावानंद मिश्रा, डॉ मिथिलेश कुमार, सिंनेट सदस्य रंजन कुमार,पत्रकार रितेश मोहन झा आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. उद्घाटन के उपरांत अतिथियों को मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के संस्थापक डॉ अशोक कुमार, प्रधानाचार्या डॉ पूनम यादव ने अंगवस्त्र, पाग आदि से सम्मानित किया. वहीं रंगकर्मी विकास कुमार,गायक आलोक कुमार,आरती ,जय कृष्ण , सुंगन्धा,भवेश आदि ने स्वागत गीत और जय जय भैरव की प्रस्तुति से अतिथियों का अभिनंदन किया.

मैथिली विषयक परिसंवाद रेणु और मैथिली को जानने में अध्याय बना मधेपुरा कॉलेज फणीश्वरनाथ रेणु एवं मैथिली विषयक परिसंवाद के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कर रहे मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के संस्थापक सह श्री कृष्ण विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अशोक कुमार ने कहा कि मिथिला अपने आप में एक जीवंत संस्कृति है जिसकी अपनी विरासत है. मैथिली भाषा इसके संचार का माध्यम है. मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा में साहित्य अकादमी और मधेपुरा कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम मैथिली एवं रेणु के महत्व को रेखांकित करने का साधन बना. अपनी विरासत से जोड़ने वाली पहल के रूप में इस आयोजन को याद किया जायेगा.

मिथिला को जीवंत बनाने में मैथिली की भूमिका- पुष्यमित्र

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार पुष्यमित्र ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मिथिला अपनी समृद्ध साहित्यिक सांस्कृतिक विरासत को निरंतर बनायी हुई है. मिथिला को जीवंत बनाये रखने में मैथिली का अहम हिस्सा है एवं मिथिला की संस्कृति में व्याप्त अलग अलग गुणों-अवगुणों को अपनी रचनाओं में अंकित कर कालजई बनाने में फणीश्वरनाथ रेणु का योगदान सर्वाधिक है. अपने बीज भाषण में पुष्पमित्र ने मिथिला और मैथिली को और आगे ले जाने की बात कही. वहीं उन्होंने फणीश्वरनाथ रेणु के साहित्यिक योगदान को शब्दों की विवेचना कर समझाया.

मैथिली में रेणु का योगदान आमजन को रेखांकित करने वाला- तारानंद

परिसंवाद में प्रख्यात मैथिली साहित्यकार तारानंद वियोगी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि फणीश्वरनाथ रेणु और मिथिला विषय पर परिसंवाद एक ऐसा प्रयास है. इसमें साहित्य जगत के बड़े हस्ताक्षर रेणु एवं मिथिला की सांस मैथिली को गहराई से जानने का रास्ता तैयार होगा. अपने संबोधन में उन्होंने रेणु की रचना महक, लाल पान की बेगम, पंचलाइट, तबे एकला चलो रे, ठेस, संवदिया आदि पर प्रकाश डालते हुए अन्य मैथिल साहित्यकारों की रचनाओं और उसके विभिन्न पहलुओं को बड़ी बारीकी से रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि इसको इंकार नहीं किया जा सकता कि आंचलिकता ने रेणु के काल में ही अपने आप को पूर्ण पाया. उन्होंने कहा मिथिला मैथिली से अपनी पूर्णता प्राप्त करती है. उन्होंने अपनी संस्कृति से जुड़ने पर बल दिया.

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बीएनएमयू के पूर्व एनएसएस समन्वयक प्रो अभय कुमार साहित्य अकादमी दिल्ली और मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रेणु एवं मैथिली विषयक परिसंवाद में स्थानीय, प्रांतीय एवं राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मैथिली और रेणु के चाहने वालों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि सबों की उपस्थिति से यह कार्यक्रम अपने आयोजन के औचित्य को सफलता पूर्वक प्राप्त कर रहा है. कार्यक्रम का संचालन करते हुए किसलय कुमार ने पुरे कार्यक्रम में अतिथि और श्रोताओं को अपनी शानदार उद्घोषणा से बांधे रखा.

रेणु और मैथिली पर परिसंवाद में पूरा माहौल हुआ मैथिलमय

मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा की प्रधानाचार्य डॉ पूनम यादव ने इस मौके पर बताया कि रविवार को कौशल्यागराम स्थित मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा का श्री बिंदेश्वरी बाबू सभागार एक अलग रंग में नजर आया. साहित्य अकादमी दिल्ली और मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में सिर्फ रेणु और मैथिली पर ही चर्चा नहीं हुई बल्कि अतिथियों ,वक्ताओं के पूर्णत मैथिली भाषा में संबोधन श्रोताओं को भी मैथिलमय माहौल में तब्दील कर गया. इस अवसर पर बीएनएमयू के डीन रहे वरिष्ठ साहित्यकार विनय कुमार चौधरी,रोसरा के निबंधन पदाधिकारी नृपेश झा,सिद्धेश्वर प्रसाद यादव,मणिभूषण वर्मा, डॉ सीताराम शर्मा, डॉ आलोक कुमार,प्रो मनोज भटनाकार,प्रो मनोज झा,प्रो सच्चिदानंद शशि,प्रो संजय वशिष्ट,प्रो अशोक झा ,प्रो किरण कुमारी,प्रो विनय झा,प्रो उमेश कुमार,प्रो हर्ष वर्धन सिंह राठौर आदि सहित सैकड़ों की संख्या में रेणु और मैथिली के चाहने वालों की उपस्थिति रही.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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