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Home बिहार मधेपुरा मॉडल स्कूल बनने के बाद सीमित नामांकन से बढ़ी चिंता, अभिभावकों में असमंजस

मॉडल स्कूल बनने के बाद सीमित नामांकन से बढ़ी चिंता, अभिभावकों में असमंजस

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मॉडल स्कूल बनने के बाद सीमित नामांकन से बढ़ी चिंता, अभिभावकों में असमंजस

पोषक क्षेत्र के बच्चे वंचित, नौवीं में नामांकन संकट गहराया

उदाकिशुनगंज.

प्रखंड मुख्यालय स्थित एसबीजेएस उच्च विद्यालय को मॉडल स्कूल बनाये जाने के बाद नौंवी कक्षा में नामांकन को लेकर छात्रों व अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. विद्यालय परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक जानकारी लेने के लिए पहुंच रहे हैं. नामांकन को लेकर लगातार विद्यालय का चक्कर लगाया जा रहा है, लेकिन स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है.

ज्ञात हो कि जिले के सभी 13 प्रखंड मुख्यालयों में मॉडल स्कूल स्थापित किये जाने के बाद नामांकन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. प्रत्येक मॉडल स्कूल में 45 छात्रों के नामांकन का प्रावधान किया गया है, लेकिन चयनित छात्रों की सूची में पोषक क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) के एक भी बच्चे का नाम शामिल नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है. स्थानीय लोगों व अभिभावकों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. जानकारी के अनुसार जिन छात्रों का चयन मॉडल स्कूल के लिए किया गया है. वे अधिकांशतः अन्य क्षेत्रों से हैं. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में बाहरी बच्चों का चयन किया गया, जबकि प्राथमिकता पोषक क्षेत्र के छात्रों को दी जानी चाहिए थी. वहीं पोषक क्षेत्र के मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का कहना है कि उन्हें इस चयन प्रक्रिया या किसी प्रकार की परीक्षा की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गयी थी. उन्होंने बताया कि उनके विद्यालयों से आठवीं कक्षा उत्तीर्ण सभी छात्रों को स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) जारी कर दिया गया है. ताकि वे निकटतम उच्च विद्यालय में नामांकन लेकर आगे की पढ़ाई जारी रख सकें, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि ये छात्र पिछले एक सप्ताह से नौवीं कक्षा में नामांकन के लिए भटक रहे हैं. विद्यालयों में स्पष्ट दिशा-निर्देश के अभाव में उनका दाखिला अधर में लटक गया है. वही एसबीजेएस हाई स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया कि विद्यालय को मॉडल स्कूल घोषित किए जाने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार द्वारा नौवीं कक्षा में नामांकन को लेकर कोई स्पष्ट आदेश या पत्र जारी नहीं किया गया है. इसी कारण विद्यालय प्रशासन असमंजस की स्थिति में है और फिलहाल किसी भी छात्र का नामांकन नहीं किया जा रहा है. गौरतलब है कि पूर्व वर्षों में इस विद्यालय में हर साल करीब 400 छात्रों का नौवीं कक्षा में नामांकन होता रहा है,

लेकिन मॉडल स्कूल बनने के बाद केवल 45 सीटों की सीमा तय कर दिया है. इससे बड़ी संख्या में छात्रों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है. अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से मांग की है कि शीघ्र ही पुरानी व्यवस्था के तहत नामांकन प्रक्रिया को बहाल करने की दिशा में पहल की जाय, ताकि पोषक क्षेत्र के बच्चों के अधिकारों के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो और उन्हें समय पर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके.

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