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बीएनएमयू में गेस्ट फैकल्टी के लिए पीएचडी करना अब हुआ मुश्किल

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बीएनएमयू में गेस्ट फैकल्टी के लिए पीएचडी करना अब हुआ मुश्किल

पीएचडी नामांकन से पहले देना होगा अतिथि शिक्षक पद से इस्तीफा मधेपुरा. भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय ने पीएचडी शोध कार्य को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. विश्वविद्यालय के ज्ञापांक- जीएस/डीआरए-09/24)-1074/2024 दिनांक-18/10/2024 की हालिया अधिसूचनाओं के अनुसार अब अतिथि सहायक प्राध्यापक/गेस्ट फैकल्टी को पीएचडी करने के लिए पद से इस्तीफा देना होगा. बिना त्यागपत्र दिये गेस्ट टीचर (अतिथि शिक्षक) का पीएचडी कोर्सवर्क या शोध में नामांकन संभव नहीं होगा. विश्वविद्यालय द्वारा जारी पीएचडी शोध विनियम-2016 (संशोधित 2018) के अंतर्गत निर्देश-(iv) में स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक को शोध कार्य के लिए कोर्स वर्क में नामांकन लेने से पहले पद से त्यागपत्र देना होगा तथा संबंधित विभाग/महाविद्यालय से त्यागपत्र की स्वीकृति की प्रति विश्वविद्यालय में जमा करनी होगी. यह प्रावधान अधिसूचना की तिथि से ही प्रभावी माना गया है. यह अधिसूचना पैट-19 और पैट-20 में शोधरत शोधार्थी के संदर्भ में शोधरत शोधार्थियों के संदर्भ में भी उपरोक्त निदेश शोध कार्य की शेष अवधि के लिए लागू माना जायेगा. इसी क्रम में गत दिनों विद्वत् परिषद् की बैठक (19.11.2025) के निर्णय के आलोक में विश्वविद्यालय ने एक नई अधिसूचना जारी करते हुए सभी विभागाध्यक्षों और प्रधानाचार्यों से यह निर्देशित किया है कि पीएचडी में नामांकित ऐसे सभी अतिथि सहायक प्राध्यापक/प्राध्यापिकाओं की समेकित सूची पांच जनवरी 2026 तक उपकुलसचिव (शैक्षणिक) कार्यालय को उपलब्ध करायी जाय. इससे यह साफ हो गया है कि विश्वविद्यालय अब गेस्ट फैकल्टी और पीएचडी शोधार्थी की स्थिति को लेकर किसी प्रकार की ढील नहीं देना चाहता. विश्वविद्यालय के इस निर्णय से बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गयी है. वर्षों से पढ़ा रहे गेस्ट फैकल्टी के सामने अब रोजगार छोड़कर पीएचडी करने या पीएचडी छोड़कर गेस्ट फैकल्टी बने रहने की कठिन चुनौती खड़ी हो गयी है. शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय शोध के इच्छुक अतिथि शिक्षकों के लिए संकट उत्पन्न करेगा.

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