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बिनु सतसंग ना हरि कथा, तेही बिन मोह ना भाग: साध्वी अमृता

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बिनु सतसंग ना हरि कथा, तेही बिन मोह ना भाग: साध्वी अमृता

प्रतिनिधि, ग्वालपाड़ा

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा झलारी चौक पर श्रीहरि कथा के दूसरे दिन आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी अमृता भारती ने कहा कि बिनु सतसंग ना हरि कथा, तेही बिन मोह ना भाग अर्थात सत्य का संग किये बिना केवल हरि कथा से कल्याण संभव नहीं. सत्य को जाने बिना मोह भंग नहीं होता और जब तक मोह भंग नहीं होता, तब तक प्रभु के चरणों से प्रीति दृढ़ नहीं हो सकती. गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन चरित्र हमें बताता है कि मोह रूपी अज्ञानता में वह अपनी विद्वता को किस प्रकार स्त्री मोह के पीछे लगा रहे थे, लेकिन जब तंद्रा टूटी और अंतरात्मा ने झकझोरा कि गुरु ने ज्ञान इश्वरोन्मुख होने के लिए दिया था न कि संसारोन्मुख होने के लिए. गोस्वामी जी ने गुरु के वचनों को मंत्रवत मान लक्ष्य की ओर बढ़ चले, साधना किया. अंततः इंद्रियों का गुलाम तुलसी इंद्रियों के स्वामी गोस्वामी तुलसीदास जी बने.

भक्ति के नौ सोपान हैं

गोस्वामी जी ने श्रीरामचरितमानस में नवधा भक्ति का वर्णन किया. अक्सर लोग नवधा भक्ति को नौ प्रकार की भक्ति कहते हैं, लेकिन यह भक्ति के नौ सोपान हैं और यह सोपान संत के संग से शुरू होती है. स्वामी यादवेंद्रानंद ने कहा कि श्रीराम का चरित्र गोस्वामी जी के मानस पटल पर उतरा तो गुरु नरहरि दास जी की कृपा से क्योंकि आध्यात्म मार्ग में ज्ञान निज प्रयास से नहीं, गुरु प्रसाद से प्राप्त होती है. इसलिए एक भक्त कहता है कि पानी में डूबे तो मृत्यु निश्चित है, पर गुरु भक्ति में डूबे तो मुक्ति निश्चित है. कार्यक्रम में भजन व सतसंग का अनूठा संगम रहा. भजन गायिका निगम भारती, लक्ष्मी भारती, गायक गोपाल, पैड वादक रामचंद्र, तबला वादक श्याम ने संगत किया.

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