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Home बिहार मधेपुरा धर्म, सेवा व सांस्कृतिक पुनर्जागरण के सशक्त प्रतीक थे आचार्य किशोर

धर्म, सेवा व सांस्कृतिक पुनर्जागरण के सशक्त प्रतीक थे आचार्य किशोर

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धर्म, सेवा व सांस्कृतिक पुनर्जागरण के सशक्त प्रतीक थे आचार्य किशोर

सिंहेश्वऱ पद्मश्री सम्मानित व बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल की जयंती पर शुक्रवार को सिंहेश्वरनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इस दौरान श्रद्धालुओं, मंदिर न्यास समिति के पदाधिकारियों व गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक योगदान को याद किया. मौके पर मंदिर न्यास समिति के सदस्य विजय कुमार सिंह ने कहा कि आचार्य किशोर कुणाल केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि धर्म, सेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के सशक्त प्रतीक थे. उनका योगदान बिहार के धार्मिक इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा. मंदिर परिसर स्थित दुर्गा मंदिर के समीप आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि आचार्य किशोर कुणाल ने मंदिर प्रबंधन, धार्मिक संस्थाओं के विकास, तीर्थस्थलों के संरक्षण तथा समाजसेवा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किये. उनके प्रयासों से अनेक धार्मिक स्थलों को नई पहचान मिली तथा धार्मिक पर्यटन को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिला. कार्यक्रम में मंदिर न्यास समिति के कोषाध्यक्ष दिलीप कुमार खंडेलवाल, हरेंद्र मंडल, योग नारायण राय, रोशन ठाकुर व स्मिता सिंह आदि ने आचार्य किशोर कुणाल के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला. वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने धार्मिक आस्था को जनसेवा से जोड़कर समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया. श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने तथा धार्मिक व सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. मौके पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं व स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा. वक्ताओं ने कहा कि आचार्य किशोर कुणाल का जीवन समाज, संस्कृति और धर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक था. उनकी जयंती पर बिहार के विभिन्न मंदिरों, ट्रस्टों व धार्मिक संस्थानों में भी उन्हें नमन किया गया. उनके द्वारा किये गये सुधारात्मक कार्य तथा जनकल्याण की सोच आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी.

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