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लखीसराय में करोड़ों की लागत से बनी सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल

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लखीसराय में करोड़ों की लागत से बनी सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल
निर्माणाधीन सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल.

सूर्यगढ़ा (लखीसराय) से राजेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट:

Road Construction Quality: जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड अंतर्गत मेदनीचौकी थाना क्षेत्र में मिल्की देवघरा एनएच-80 सड़क से अभयपुर तक बन रही सड़क की गुणवत्ता को लेकर विवाद गहरा गया है. करीब 9 करोड़ 98 लाख 27 हजार 530 रुपये की लागत से निर्माणाधीन इस सड़क में तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम (RRSMP) के तहत बन रही इस सड़क की कुल लंबाई 8.80 किलोमीटर है. इसमें 7.50 किलोमीटर बिटुमिनस (कालीकरण) सड़क तथा 1.30 किलोमीटर पीसीसी सड़क का निर्माण प्रस्तावित है. योजना में सात वर्षों तक सड़क के रखरखाव के लिए भी 74.02 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है.

निर्माण कार्य में मानकों का पालन नहीं करने का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है. उनका कहना है कि कई स्थानों पर पर्याप्त तैयारी और आधार परत मजबूत किए बिना मिट्टी एवं धूलयुक्त सतह पर ही कालीकरण किया जा रहा है. साथ ही सड़क की मोटाई भी प्राक्कलन के अनुरूप नहीं दिखाई दे रही है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य इसी प्रकार जारी रहा तो सड़क की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर गंभीर असर पड़ सकता है.

विभागीय निगरानी पर भी सवाल

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण एजेंसी के संवेदक की राजनीतिक पहुंच होने के कारण विभागीय निगरानी प्रभावी ढंग से नहीं हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा निर्माण स्थल का नियमित निरीक्षण नहीं किए जाने से कार्य मनमाने तरीके से कराया जा रहा है.

जनप्रतिनिधियों ने की जांच की मांग

जदयू नेता प्रवीण कुमार पंकज ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए संबंधित विभाग से तत्काल तकनीकी जांच कराने की मांग की है. वहीं राजद युवा जिलाध्यक्ष विनय कुमार साहु ने भी निर्माण कार्य में अनियमितता की आशंका जताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.उन्होंने कहा कि लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली सड़क में यदि गुणवत्ता से समझौता किया गया तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा.

तकनीकी जांच की उठी मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं ग्रामीण कार्य विभाग से सड़क की मोटाई, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और प्राक्कलन के अनुरूप कार्य होने की तकनीकी जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए.

हालांकि निर्माण कार्य में अनियमितता के आरोप स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए हैं. आरोपों की आधिकारिक पुष्टि विभागीय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी.

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