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Home बिहार लखीसराय कुछ समय के लिए बरसे बादल, बोरिंग वाले गांवों में धान रोपनी में आयी तेजी

कुछ समय के लिए बरसे बादल, बोरिंग वाले गांवों में धान रोपनी में आयी तेजी

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कुछ समय के लिए बरसे बादल, बोरिंग वाले गांवों में धान रोपनी में आयी तेजी

लखीसराय. जिले में बुधवार की देर शाम तक हुई बारिश से लोगों को थोड़ी राहत मिली है. बुधवार की सुबह से ही आकाश में मंडराते बादलों को देखकर शाम तक बारिश होने की संभावना जतायी जा रही थी. हुआ भी ठीक ऐसा ही. शाम आठ बजे अचानक तेजी से बारिश होने लगी. जिससे पूरी रात लोग गर्मी से राहत मिल सकी. वहीं दूसरी ओर वैसे किसान जिन्हें खेतों का पटवन कर धान की रोपनी करना था, उन्हें भी बारिश का पानी ने राहत दी. जिले में बोरिंग से पटवन करके किसान धड़ल्ले से धान की रोपनी कर रहे हैं. इसके साथ ही वे वर्षा के लिए आकाश की और टकटकी लगाये बैठे हैं. बुधवार की शाम को बारिश होने से किसानों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन किसानों को अभी भी लगातार झमाझम बारिश की प्रतीक्षा है.

11 हजार 811 हेक्टेयर में अभी तक हुई धान की रोपनी

जिले में अब तक 11 हजार 811 हेक्टेयर में धान की रोपनी की जा चुकी है. यानी जिले के कुल लक्ष्य की एक चौथाई से अधिक हेक्टेयर में धान की रोपनी की जा चुका है. जिले में कुल 41 हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी की जानी है. लगातार बारिश होने से पांच दिनों के अंदर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन बारिश की गतिविधि कम होने से जिला लक्ष्य प्राप्ति की ओर धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

कहते हैं किसान

बारिश नहीं होने के कारण इलेक्ट्रिक मोटर चलकर खेतों में पानी दिया जा रहा है. यदि बारिश लगातार होती, तो धान की रोपनी में रफ्तार आती.-

रणधीर सिंह, लोदिया

खेतों में धान का बिचड़ा तैयार है, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बारिश का पानी धान के लिए अति आवश्यक है.-

भरत पासवान, गोविंद बीघा

किसान बोरिंग से खेतों में पटवन करके धान की रोपनी कर रहे हैं, लेकिन बारिश के बिना धान के पौधों को पोषित कर पाना कठिन है. –

सुखदेव सिंह, रेहुआ

लगातार धूप होने के कारण नदी व नाला का पानी सूख रहा है. बारिश नहीं हुई तो पानी का लेयर भागेगा और बोरिंग भी काम नहीं करेगी . ऐसे में रोज-रोज धन का पटवन करना किसानों के लिए संभव नहीं रह जायेगा.-

उमाशंकर सिंह, रेहुआ

वर्तमान में किस रात भर जागकर खेत का पटवन कर रहे हैं, इसके बाद धान की रोपनी हो रही है. पानी नहीं रहने से किसानों को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. –

महेश कुमार, गढ़ी बिशनपुर

धान की खेती के लिए बोरिंग पर्याप्त साधन नहीं है. बोरिंग से पटवन करने के बाद धान के लिए वर्षा का पानी आवश्यक है. वर्षा के पानी के बिना धन की खेती करना संभव नहीं है. –

वाल्मीकि यादवB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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