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स्कूल जाने आने के लिए सड़क नहीं, पगडंडी बना सहारा, खतरे की आंशका

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स्कूल जाने आने के लिए सड़क नहीं, पगडंडी बना सहारा, खतरे की आंशका

हाल नवसृजित प्राथमिक विद्यालय चंद्रवंशी टोला मोहद्दीनगर का2006 में दान में जमीन मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने बनवाया था विद्यालयबरसात के दिनों में खेतों में पानी भरने से होती है बच्चों को आवागमन में परेशानीहलसी.

प्रखंड मुख्यालय अंतर्गत नवसृजित प्राथमिक विद्यालय चंद्रवंशी टोला मोहद्दीनगर स्थित विधालय जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है. जिस कारण खेत के पगडंडी के सहारे बच्चे व शिक्षक आवागमन को विवश हैं. इससे उन्हें काफी परेशानी सामना करना पड़ रहा है. वहीं बारिश मौसम में खेतों में जब पानी भर जाता है तो रास्ते में फिसलन होने से बच्चे गिरकर घायल हो जाते हैं.

बता दें कि नवसृजित प्राथमिक विद्यालय चंद्रवंशी टोला मोहद्दीनगर में नामांकित बच्चों 113 है और शिक्षक की संख्या छह है. विद्यालय में बच्चों के कक्षा के लिए तीन कमरे हैं, वहीं एक कार्यालय व एक रसोईघर है. विद्यालय के प्रधानाध्यापिका निकहत आफिस ने बताया कि स्कूल आने जाने का रास्ता पतला है. खेत के रास्ते में पानी भरा हुआ है. जिससे बच्चों और शिक्षकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है, उनके गिरने का हमेशा डर बना रहता है.

बताया जा रहा है जब इस विद्यालय की स्थापना के लिए जमीन दाता बिंदेश्वरी राम के द्वारा सन् 2006 में जमीन दिया गया था, लेकिन बीस वर्षों से विद्यालय को अपना रास्ता नहीं मिल पाया है. अभिभावक, शिक्षक एवं बच्चों खेत के पगडंडियों के सहारे स्कूल पहुंचते हैं. इस बार एक हजार से ज्यादा मतदाताओं होने के कारण इस विद्यालय को नया मतदान केंद्र भी बना गया है. उस दौरान भी इस विद्यालय पर पहुंचने वाले मतदाता और अधिकारी पगडंडियों के सहारे ही मतदान स्थल पर पहुंचे थे. उन्होंने बताया गया कि विद्यालय का रास्ता निर्माण को लेकर मुखिया व अन्य जनप्रतिनिधियों सहित ग्रामीणों के साथ बैठक कर कई बार रास्ते की मांग की गयी, लेकिन निजी जमीन होने के कारण ग्रामीण रास्ता देने से कतरा रहे हैं. इसके कारण यह समस्या उत्पन्न है.

बोले अधिकारी

इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी एजाज आलम ने कहा कि नवसृजित प्राथमिक विद्यालय चंद्रवंशी टोला मोहद्दीनगर स्थित विद्यालय के समीप सभी निजी जमीन होने के कारण विद्यालय को अपना पक्की सड़क नहीं है. जिसको लेकर विभाग को सूचना दिया गया है. वहीं विभागीय कार्रवाई होने के उपरांत रास्ता को लेकर जमीन अधिग्रहण करते हुए विद्यालय को पक्का उपलब्ध कराया जायेगा.

बोले ग्रामीण

स्कूल तक रास्ता न होने पर ग्रामीण अक्सर कहते हैं कि इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, खासकर बारिश में कीचड़ और जलभराव से परेशानी होती है. जिससे बच्चे गिर कर चोटिल भी जाते हैं. उन्होंने प्रशासन से रास्ता बनवाने की मांग भी की. हालांकि जमीन मालिकों के मुकर जाने या जमीन के विवाद के कारण रास्ता नहीं बन पाया.

बच्चू रजक, ग्रामीण

बारिश में कीचड़ में फिसलने और गिरने का डर रहता है, और खेतों से गुजरने पर जहरीले कीड़े-मकोड़ों के काटने का खतरा बना रहता है. ग्रामीण अक्सर जनप्रतिनिधि एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी की बैठकों में प्रस्ताव रखते हैं, लेकिन अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधि की निष्क्रियता के कारण समाधान नहीं निकल रहा है.

उर्मिला देवी, ग्रामीण

स्कूल बनाते समय जमीन दान करने वाले तो दान कर दिये, लेकिन रास्ता का कोई व्यवस्था नहीं हो सका. बावजूद प्रशासन के द्वारा स्कूल को बना दिया. ग्रामीण कहते हैं कि जब रास्ता ही नहीं था, तो स्कूल को वहां मंजूरी देना ही गलत था. विभाग को पहले रास्ता निकालने की पहल करनी चाहिए.

सनोज कुमार, ग्रामीण

अगर बारिश ज्यादा हो गयी तो स्कूल तक आने-जाने का आवागमन भी बंद हो जाता है. खेतों में फसल लहलहाने के दौरान बच्चों को मेड़ और क्यारी से गुजरते समय विषैले जंतुओं के काटने का भी खतरा बना रहता है. स्कूल के भवन का खेतों में बने होने के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने पर हमेशा अनहोनी डर बना रहता है.

जोधी यादव, ग्रामीणB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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