गिरफ्तार बायोमीट्रिक संचालक ही निकला ‘महा-मास्टरमाइंड’, PMCH पटना का छात्र मयंक कश्यप गैंग का सरगना

NEET Re-Exam Scam Mastermind: लखीसराय नीट फर्जीवाड़ा मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जिला प्रशासन और पुलिस (DM-SP) के अनुसार, गिरफ्तार किया गया बायोमीट्रिक संचालक मयंक कश्यप ही इस पूरे सॉल्वर गैंग का मुख्य सरगना है. मयंक खुद पीएमसीएच (PMCH) पटना का एमबीबीएस फोर्थ ईयर का छात्र है, जिसने एनटीए (NTA) की अधिकृत बायोमीट्रिक कंपनी के साथ मिलकर फर्जी परीक्षार्थियों की सीधे एंट्री कराई थी.

By Divyanshu Prashant | June 22, 2026 10:40 PM

NEET Re-Exam Scam Mastermind: लखीसराय में आयोजित हुई ‘नीट यूजी 2026’ पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में जिला प्रशासन और पुलिस की एसआईटी (SIT) को एक और बड़ी और चौंकाने वाली सफलता हाथ लगी है. जांच के दौरान यह साफ हो गया है कि इस पूरे सॉल्वर नेटवर्क का मुख्य सरगना (मास्टरमाइंड) कोई बाहरी बिचौलिया नहीं, बल्कि गिरफ्तार किया गया बायोमीट्रिक संचालक मयंक कश्यप ही है. मयंक खुद पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) का एक मेधावी लेकिन शातिर छात्र है. इसी ने सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए फर्जी परीक्षार्थियों को केंद्र के भीतर सेट कराया था.

एनटीए की बायोमीट्रिक कंपनी में सेंध लगाकर खुद बना कर्मचारी

जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा संयुक्त रूप से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्य सरगना मयंक कश्यप मूल रूप से हाजीपुर के पासवान चौक का निवासी है और पीएमसीएच पटना में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष (4th Year) का छात्र है.

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा केंद्रों पर डिजिटल अटेंडेंस और फिंगरप्रिंट जांच के लिए जिस बायोमीट्रिक कंपनी को टेंडर दिया था, मयंक ने उसी के भ्रष्ट कर्मियों से हाथ मिला लिया था. वह स्वयं फर्जी तरीके से बायोमीट्रिक कंपनी का कर्मचारी बनकर केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश कर गया. इसके बाद उसने बिना किसी बायोमीट्रिक थंब इंप्रेशन (Fingerprint) के ही डमी परीक्षार्थियों को सीधे एग्जाम हॉल में बैठा दिया. यही वजह है कि पकड़े गए कुल 9 फर्जी स्कॉलर्स में से सबसे ज्यादा 7 अकेले केंद्रीय विद्यालय केंद्र से दबोचे गए हैं.

एम्स, बीएचयू और यूसीएमएस दिल्ली के ‘भावी डॉक्टर’ बने थे स्कॉलर

लखीसराय पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता को तार-तार करने वाले इस सॉल्वर गैंग के तार देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी संस्थानों से जुड़े हुए हैं. पुलिस ने जिन 9 फर्जी परीक्षार्थियों (स्कॉलर्स) को गिरफ्तार किया है, वे दूसरे छात्रों के नाम पर लाखों रुपये की डील कर परीक्षा देने बैठे थे.

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पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, फर्जी (स्कॉलर) और मूल परीक्षार्थियों का पूरा मिलान विवरण इस प्रकार है:

क्र.सं.फर्जी परीक्षार्थी (स्कॉलर / गिरफ्तार छात्र)मूल परीक्षार्थी (जिसके स्थान पर परीक्षा दी)
1.मंतोष कुमारसंजीत कुमार
2.विवेक कुमारप्रभात अमन
3.हिमांशु कुमारशुभम कुमार वर्मा
4.सौरभ झाईशान सिंह
5.पूनम कुमारीमधुप्रिया
6.अमन अग्रवालअक्षत दुबे
7.रौशन कुमारनिरंजन
8.चंचल कुमारीनंदिनी राज
9.जितेंद्र कुमारराहुल कुमार प्रिंस

NEET Re-Exam Scam Mastermind: चार राज्यों में फैले हैं सॉल्वर गैंग के तार, बड़ी जांच शुरू

गिरफ्तार बायोमीट्रिक संचालक ही निकला 'महा-मास्टरमाइंड', pmch पटना का छात्र मयंक कश्यप गैंग का सरगना 2

“लखीसराय के एसपी ने बताया कि देश के नामी चिकित्सा संस्थानों जैसे एम्स (AIIMS) रायबरेली, बीएचयू (BHU) वाराणसी, यूसीएमएस (UCMS) दिल्ली और एनएमसीएच (NMCH) पटना के छात्रों का एक साथ इस फर्जीवाड़े में पकड़ा जाना यह साबित करता है कि इसके पीछे कई राज्यों में फैला एक बहुत बड़ा संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है. बिहार, झारखंड, दिल्ली और राजस्थान के इन डमी छात्रों को लखीसराय के केंद्रों तक लाने के लिए लाखों रुपये एडवांस दिए गए थे. पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर मास्टरमाइंड मयंक कश्यप से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इस रैकेट के वित्तीय लेन-देन (Money Trail) और पर्दे के पीछे छिपे अन्य सफेदपोशों का पर्दाफाश किया जा सके.”

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इस बड़े खुलासे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सुरक्षा ऑडिट और वेंडर चयन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. लखीसराय पुलिस की टीमें फरार टेंडर मालिकों और अन्य बिचौलियों की धरपकड़ के लिए कई जिलों में लगातार छापेमारी कर रही हैं.

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